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राजस्थान में कांग्रेस का घमासान, अशोक गहलोत का जादू भी नाकाम !

संजीवनी टुडे 14-07-2020 07:37:30

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का झगड़ा कोई नया नहीं है।


जयपुर। राजस्‍थान में मचे सियासी बवाल ने न सिर्फ राज्‍य की सत्‍ता में खलबली मचा रखी है बल्कि केंद्र तक इसकी धमक सुनाई दे रही है। यहां पर कांग्रेस के सचिन पायलट ने बागी तेवर दिखाए हुए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश कांगेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की नाराजगी के बावजूद गहलोत बहुमत का आंकड़ा जुटाने में सफल रहे, लेकिन मुख्यमंत्री की इस सफलता के बावजूद पार्टी की विफलता भी उजागर हो गई है। तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी सभी को एकजुट रखने में नाकाम साबित हुई है। 

बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का झगड़ा कोई नया नहीं है। ऐसा भी नही है कि पिछले दो सालों के दौरान पायलट ने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी दर्ज नही कराई। पर उनकी शिकायतों पर पार्टी नेतृत्व ने कोई ठोस कार्रवाई नही की। इससे पायलट की नाराजगी बढ़ती गई और वो आर पार तक करने के लिए मजबूर हो गए। 

Sachin Pilot

सचिन पायलट के इन बागी तेवरों की ही बात करें तो ये उस वक्‍त भी दिखाई दिए थे जब उनके प्रदेश अध्‍यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने यहां पर विधानसभा चुनाव जीता था। सचिन पायलट के तेवरों से उस वक्‍त ही ये साफ हो गया था कि इस बार राज्‍य में सबकुछ ठीक नहीं रहने वाला है। इसके बाद रही सही कसर सचिन की ज्‍योर्तिरादित्‍य सिंधिया से मुलाकात ने पूरी कर दी। इसके बाद तो तस्‍वीर लगातार साफ और स्‍पष्‍ट होती जा रही है।

इस दौरान कांग्रेस राजनीतिक दल के तौर पर वरिष्ठ और युवा नेताओं में तालमेल बनाने में भी नाकाम रही है। युवा नेता अक्सर यह शिकायत करते रहे है कि संगठन में वरिष्ठ बुजुर्ग नेताओ को तरजीह दी जा रही है। इससे पहले वरिष्ठ नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से नाराजगी के चलते वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थाम लिया था। पार्टी को इसकी कीमत मध्यप्रदेश में अपनी सरकार गवांकर चुकानी पड़ी थी। 

Sachin Pilot

राजस्थान में भी गहलोत सरकार का संकट फिल्हाल टल जरूर गया है। पर कब तक टला है, यह कहना जल्दबाज़ी होगी। सचिन पायलट कांग्रेस में रहेंगे या नहीं, यह तो वक्त तय करेगा। पर पायलट पार्टी छोड़ते है तो इसका नुकसान कांग्रेस को होगा। क्योंकि लोगो कें बीच यह संदेश जा रहा कि पार्टी अपने नेताओं खासकर युवा नेताओ को संभालने में विफल रही है। कई नेता इसे नेतृत्व की संगठनात्मक विफलता के तौर पर भी देख रहे है। क्योंकि, पिछले तीन चार वर्षों में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की लंबी फेहरिस्त है।

गौरतलब है कि सचिन पायलट और ज्‍योर्तिरादित्‍य सिंधिया दोनों ही कभी राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड का हिस्‍सा हुआ करते थे और उनके काफी करीबी नेताओं में से थे। लेकिन बाद में ये करीबी दूरियों में तब्‍दील होती चली गई और अंत में बगावत बन गई। देखा जाए तो सचिन और ज्‍योर्तिरादित्‍य की बगावती कहानी एक ही जैसी है। जैसा बवाल पार्टी के विधानसभा चुनाव जीतने पर राजस्‍थान में हुआ था वैसा ही हाल मध्‍य प्रदेश में भी हुआ था। इस बगावत का पहला सफल चेहरा ज्‍योर्तिरादित्‍य ही बने थे। अब माना जा रहा है कि सचिन उनके ही पद चिंहों पर चल रहे हैं।

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