संजीवनी टुडे

‘गुजरात माडल’ की तर्ज पर भाजपा सांसदों के टिकट कटने की आशंका

संजीवनी टुडे 20-03-2019 17:31:08


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में भाजपा के लगभग 40 से 50 प्रतिशत उन सांसदों के टिकट कटने की संभावना बढ़ गई है, जिनके कामकाज ठीक नहीं होने की रिपोर्ट है और ऊपर से मजबूत पैरवी नहीं है। कुछ का टिकट उम्र अधिक होने के आधार पर काटा जा रहा है, कुछ का अन्य कई कारणों से। 

इसके चलते उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक के बहुत से भाजपा सांसद (लोकसभा) परेशान हैं। उनमें से जो थोड़ा मजबूत हैं और टिकट काटे जाने पर जातीय समीकरण के चलते पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, उनको राज्यसभा में भेजने का आश्वासन दिया जा रहा है। जिनकी उम्र अधिक हो गई है और जाति विशेष के कारण उप्र, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के अपनी जाति के मतदाताओं में नाराजगी का संदेश देकर वोट प्रभावित करने की स्थिति में हैं, उनको राज्यपाल बनाने का आश्वासन देकर लोकसभा चुनाव तक चुप रहने को कहा जा रहा है। इनमें से कुछ को उनके परिवार के किसी को प्रत्याशी बनाने के लिए कहा जा रहा है। इस बारे में यदि गुजरात माडल को नजीर मानें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब विधानसभा चुनाव में सभी टिकट अपने अनुसार तय करते थे। राज्य की 26 लोकसभा सीटों में से लगभग 90 प्रतिशत सीटों पर प्रत्याशी भी वही तय करते थे।  मात्र 240000/- में टोंक रोड जयपुर में प्लॉट 9314166166
इस बारे में गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार डा. हरिदेसाई का कहना है कि नरेन्द्र भाई ने गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के दौरान तरह – तरह के प्रयोग किये। उन्होंने हर विधानसभा चुनाव में लगभग 40 से 50 प्रतिशत विधायकों का टिकट काट कर नये को चुनाव लड़ाया। अब तो “गुजरात माडल” के जनक दो गुजराती भाई - नरेन्द्र भाई देश के प्रधानमंत्री हैं और उनके अतिविश्वास पात्र अमित भाई देश की सबसे बड़ी सत्ताधारी पार्टी भाजपा के अध्यक्ष हैं। दोनों आज की तारीख में इस देश के सर्वशक्तिमान हैं। वह जो चाहे कर सकते हैं। संभव है लोकसभा का टिकट तय करते समय ‘गुजरात माडल’ को ‘भारत माडल’ बनाने की कोशिश करें और पार्टी ( भाजपा) के वर्तमान सांसदों में से लगभग 40 से 50 प्रतिशत के टिकट काट दें। जनता के सत्ता विरोधी रुख को वह प्रत्याशी के कामकाज विरोधी रुख के तौर पर आगे करके सांसदों का या विधायकों का टिकट काटकर नया प्रत्याशी खड़ा कर देते हैं। इससे जनता की नाराजगी बहुत हद तक कम हो जाती है लेकिन गुजरात का यह फार्मूला पूरे देश व सभी राज्यों में कितना कारगर होगा, यह मई 2019 में सबके सामने आ जायेगा।

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भाजपा के राज्यसभा सांसद लाल सिंह बड़ोदिया का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गुजरात की कुल 26 लोकसभा सीटें जीती थीं। इस बार (2019) के लोकसभा चुनाव में राज्य के 26 वर्तमान सांसदों में से 13 से 17 सांसदों का टिकट काटकर नये लोगों को टिकट दिया जा सकता है। इसी तर्ज पर अन्य राज्यों में भी भाजपा के वर्तमान सासंदों में से लगभग 50 प्रतिशत तक का टिकट काटा जा सकता है। एक क्षेत्रीय समाचार टीवी चैनल के सम्पादकीय प्रमुख मनोज का कहना है कि भाजपा झारखंड में 3 , बिहार में 9 , उत्तर प्रदेश में 30 छत्तीसगढ़ में 7, म.प्र. में 10, राजस्थान में 12, महाराष्ट्र में 11, उत्तराखंड में 2, हिमाचल प्रदेश में 2 , दिल्ली में कम से कम तीन वर्तमान सांसदों के टिकट काट सकती है। इनकी जगह पर नये चेहरे लाने की बात चल रही है।

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