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कांग्रेस में सत्ता संग्राम के बाद सीएम गहलोत और सचिन पायलट के लिए आ रही है कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं

संजीवनी टुडे 14-08-2020 12:11:54

सचिन पायलट एवं कांग्रेस के 18 अन्य विधायक मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व से कथित तौर पर नाराज थे और वे 10 अगस्त को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के लगभग एक महीने बाद जयपुर लौटे हैं।


जयपुर। राजस्थान में आज से विधानसभा का सत्र आरंभ हो चूका है। आज भारतीय जनता पार्टी आज अशोक गहलोत की सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। गुरूवार को बीजेपी के विधायक दल की बैठक में अविश्वास प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया गया। वहीं, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुलासा किया है कि सरकार खुद ही विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाएगी। 

ऐसे में राजस्थान की सियासत के लिए आज का दिन बहुत खास है।  राज्य में लगभग एक माह से अधिक लंबे वक्त तक चले राजनीतिक बवाल के पश्चात शुक्रवार से विधानसभा का विशेष सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। विधानसभा का यह सत्र बहुत अहम और हंगामेदार होने की आसार है। राजनीतिक कयासों से परे हुए घटनाक्रम के पश्चात हो रहे इस सत्र में 'विश्वास प्रस्ताव' और 'अविश्वास प्रस्ताव' दोनों ही लाये जायेंगे। 

Gehlot and Pilot

इसके लिये सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष दोनों ने जोरदार तैयारियां कर रखी हैं। विधानसभा का सत्र का बहुत अलग अंदाज में होने की आसार है। इसमें विरोध की टीस, एक दूसरे के प्रति अविश्वास और राजनीतिक मजबूरियों के बावजूद दोनों दलों में एकजुटता देखने का मिल सकती है। 

सत्र से पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने गुरुवार को बैठक कर अपनी-अपनी रणनीति बनाई। कांग्रेस ने सत्ता के लिये हुए संग्राम के बाद सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमे को एक करके एकजुटता का परिचय दिया है। दोनों खेमे गिले शिकवे भुलाकर विधानसभा में अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन करेंगे।  

Gehlot and Pilot

गहलोत और पायलट खेमे के पश्चात चले सियासी खेल में अपने हाथ कुछ भी आते नहीं देखकर भाजपा ने अब सरकार को विधानसभा में घेरने की योजना बनाई है। सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव की काट के लिये विपक्षी पार्टी भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा की है। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि वो शुक्रवार से शुरू होने वाले विधानसभा के अधिवेशन में ख़ुद ही विश्वास प्रस्ताव रखेंगे। गुरुवार को जयपुर स्थित उनके निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में गहलोत ने कहा, "हमलोग उन 19 विधायकों (सचिन पायलट और उनके 18 समर्थक) के बग़ैर भी सदन में बहुमत साबित कर देते, लेकिन उससे हमें ख़ुशी नहीं होती, क्योंकि अपने तो अपने होते हैं।"

गुरुवार को हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में अपने विधायकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "कांग्रेस की लड़ाई तो सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी के नेतृत्व में डेमोक्रेसी को बचाने की है, पिछले एक माह में कांग्रेस पार्टी में आपस में जो भी नाइत्तेफ़ाकी हुई है, उसे देश के हित में, प्रदेश के हित में, प्रदेशवासियों के हित में और लोकतंत्र के हित में हमें फॉरगेट एन्ड फॉरगिव, आपस में भूलो और माफ करो और आगे बढ़ो की भावना के साथ डेमोक्रेसी को बचाने की लड़ाई में लगना है।"

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गहलोत ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि फॉरगेट एन्ड फॉरगिव की भावना के साथ सेव डेमोक्रेसी हमारी प्रायोरिटी होनी चाहिए। देश में वन बाई वन चुनी हुई सरकारों को तोड़ने की जो साजिश चल रही है, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश आदि राज्यों में सरकारें जिस तरह टॉपल की जा रही हैं, ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स, ज्यूडिशियरी का जो दुरूपयोग हो रहा है ये डेमोक्रेसी को कमजोर करने का बहुत डेंजरस गेम है।"

गौरतलब है कि सचिन पायलट एवं कांग्रेस के 18 अन्य विधायक मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व से कथित तौर पर नाराज थे और वे 10 अगस्त को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के लगभग एक महीने बाद जयपुर लौटे हैं। राजस्थान में लगभग एक महीने से जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है। 

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