संजीवनी टुडे

गुड़िया गैंगरेप की बर्बरता सुनकर सिहर जाएंगे आप, जानिए- डॉक्टरों की जुबानी, जुल्म की कहानी

संजीवनी टुडे 20-01-2020 21:28:56

2013 में हुए गुड़िया गैंगरेप मामले में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को प्रदीप और मनोज कुमार के खिलाफ पुलिस ने जान से मारने की कोशिश, रेप, किडनेपिंग और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। दोनों दोषी प्रदीप और मनोज कुमार ने बालिका के साथ बर्बरता की थी। इलाज के दौरान बच्ची के शरीर से मोमबत्ती और कांच की शीशी निकली थीं।


नई दिल्ली। 2013 में हुए 'गुड़िया' गैंगरेप मामले में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को प्रदीप और मनोज कुमार के खिलाफ पुलिस ने जान से मारने की कोशिश, रेप, किडनेपिंग और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। दोनों दोषी प्रदीप और मनोज कुमार ने बालिका के साथ बर्बरता की थी। इलाज के दौरान बच्ची के शरीर से मोमबत्ती और कांच की शीशी निकली थीं। दोषी ठहराए जाने के बाद अब 30 जनवरी को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में सजा पर बहस होगी। मासूम का उपचार कर रहे डॉक्टर ने जो बताया उसे जानकर आप भी विचलित हो सकते हैं। डॉक्टर ने गुड़िया के साथ हुई बर्बरता के बारे कहा की बच्ची के निजी अंग में 200 मिलीलीटर वाली कांच की बोतल और मोमबत्ती के दो-तीन टुकड़े घुसा दिए गए थे। 

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दरिंदो ने उसे गला दबाकर मौत के घाट भी उतारना चाहा लेकिन 40 घंटे बाद गुड़िया को दुष्कर्मियों से मुक्त करा लिया गया। डॉक्टर के मुताबिक़ बच्ची न तो प्राकृतिक तरीके से पेशाब कर पाती थी और न ही शौच, जिसके बाद पेट में एक कृत्रिम छेद बनाया गया जिससे वह शौच आदि कर सके। हालांकि कुछ महीने बाद इसे बंद कर दिया गया और गुड़िया सामान्य तरीके से पेशाब और शौच करने लगी। 

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बच्ची की हालत को देखते हुए उसके निजी अंगों की कई कंस्ट्रक्टिव सर्जरी करनी पड़ी थी। इतना ही नहीं डॉक्टरों ने बताया कि गुड़िया के होठों पर, गालों पर, बांह पर और गुदाद्वार पर कई चोटें थीं। आपको बता दें राजधानी दिल्ली स्थित गांधीनगर में साल 2013 में एक पांच वर्षीय मासूम बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। 15 अप्रैल 2013 की शाम गुड़िया अपने गांधी नगर के लापता हुई और 17 अप्रैल की सुबह घर के पास ही मिली थी। जिसके बाद उसको इलाज के लिए एम्स अस्पताल ले जाया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसके शरीर के अंदर से तेल की शीशी और मोमबत्ती निकाली थी। 

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