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महिला ने सड़क दुर्घटना में पति की मौत पर मांगा प्यार का मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये जवाब

संजीवनी टुडे 01-07-2020 10:47:53

मोटर दावा न्यायाधिकरण ने 50 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया लेकिन पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील कर दी।


नई दिल्ली। साल 1998 में सड़क दुर्घटना में हुई पति की मौत को लेकर एक महिला ने न्यायालय से मुआवजे की मांग की। इस मामले में अपना फैसला सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दाम्पत्य सुख की क्षति के मुआवजे में ही प्रेम और वात्सल्य की क्षति भी कवर होगी, इसके लिए अलग से मद बनाकर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता। 

Supreme Court

इसके साथ ही अदालत ने दाम्पत्य सुख की क्षति के साथ प्रेम और वात्सल्य खो जाने का मुआवजा देने के हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुआवजा देने की एक समान प्रणाली होनी चाहिए। यह पहले ही तय किया जा चुका है कि सड़क दुर्घटना में मृत्यु के मामले में तीन मदों में मुआवजा तय होगा। ये मदें हैं, संपत्ति का नुकसान, साथी (दाम्पत्य सुख, माता-पिता का सुख और भाई बहन के साथ का सुख) के अभाव का नुकसान तथा अंतिम संस्कार का खर्च। प्यार-मोहब्बत के नुकसान का खर्च उक्त साथी में सम्मिलित है, उसे अलग से मद नहीं बनाया जा सकता।

Supreme Court

अपीलकर्ता पीड़िता का पति कतर में काम करता था छुट्टी पर पंजाब के राजपुरा में आया हुआ था। इस दौरान सड़क दुर्घटना में पीड़िता के पति मौत हो गई थी। ऐसे में मोटर दावा न्यायाधिकरण ने 50 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया लेकिन पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील कर दी। हाईकोर्ट ने मुआवजे को बढ़ा दिया जिसके खिलाफ बीमा कंपनी सुप्रीम कोर्ट आई थी।

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट और मोटर ट्रिब्यूनल दाम्पत्य सुख और अन्य सुख के खो जाने की क्षति का मुआवजा दिलवा सकते हैं लेकिन इसके साथ प्रेम की क्षति का मुआवजा अलग से नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने यह फैसला बीमा कंपनी और पीड़ित पक्ष दोनों की अपील पर दिया। 

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