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क्या सफल होगा चंद्रयान-2 मिशन? अब बचे हैं मात्र 10 दिन, मंडराया माइनस 200 डिग्री का खतरा

संजीवनी टुडे 11-09-2019 17:17:44

वैज्ञानिको ने ऑर्बिटर के जरिये चंद्रमा की सतह पर लैंडर विक्रम के होने का पता लगा लिया है


नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग' का अभियान शनिवार को अपनी तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो पाया था। चंद्रयान 2 के लैंडर से संपर्क टूट गया था। 

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इसके बाद वैज्ञानिको ने ऑर्बिटर के जरिये चंद्रमा की सतह पर लैंडर ‘विक्रम' के होने का पता लगा लिया है, लेकिन इसके बाद से अब तक पांच दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक विक्रम' से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। 

इस बीच लोगों के मन में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। उनके अनुसार क्या एक बार फिर से लैंडर विक्रम से इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन के वैज्ञानिक संपर्क साध पाएंगे? क्या लैंडर विक्रम से संपर्क करने के लिए कोई डेड लाइन है? ये वो सवाल हैं जिसके जवाब का पूरी दुनिया को इंतज़ार है। 

हालांकि, इसरो के वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन इस मिशन को पूरा करने करने के लिए उनके पास सिर्फ 10 दिनों का समय और बचा है। 21 सितंबर तक ही वे लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद लूनर नाइट की शुरुआत हो जाएगी। जहां हालात बिल्कुल बदल जाएंगे। 14 दिन तक ही विक्रम को सूरज की रोशनी मिलेगी। बता दें कि लैंडर और रोवर को भी सिर्फ 14 दिनों तक काम करना था। 

खबरों के मुताबिक, चांद की सतह पर ठंड बेहद खतरनाक होती है। खास कर साउथ पोल में तो तापमान माइनस 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। लैंडर विक्रम ने भी साउथ पोल में ही लैंड किया है। चंद्रमा का ऐसा इलाका जहां अब तक कोई देश नहीं पहुंचा है। 

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खास बात ये है कि लैंडर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, यानी इसमें कोई भी टूट-फूट नहीं हुई है। इसरो लैंडर के साथ फिर से संपर्क स्थापित करने की हर संभव कोशिश कर रहा है। बता दे कि, 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने के भारत के साहसिक कदम को उस वक्त झटका लगा जब चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम' से चांद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर संपर्क टूट गया। 

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