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गृह मंत्री के प्रस्ताव को ठुकराते हुए किसानों ने दो टूक कहा, केंद्र सरकार से अब बिना शर्त होगी बातचीत

संजीवनी टुडे 29-11-2020 22:30:00

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिल्ली में बुराड़ी आने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए किसानों ने दिल्ली के सभी मुख्य रास्तों को बंद करने का ऐलान किया है।


चंडीगढ़। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा में डटे किसान आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिल्ली में बुराड़ी आने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए किसानों ने दिल्ली के सभी मुख्य रास्तों को बंद करने का ऐलान किया है। गृह मंत्री के प्रस्ताव को ठुकराते हुए किसानों ने दो टूक कहा कि सरकार से अब बिना शर्त बातचीत होगी। किसान किसी भी कीमत पर बुराड़ी नहीं जाएंगे। यही नहीं हरियाणा की खाप पंचायतें भी किसानों के समर्थन में उतर आई हैं। इसके साथ ही पंजाब तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री के बीच फोन कॉल का विवाद थमने की बजाय बढ़ता जा रहा है। पंजाब सीएम की ओर से हरियाणा सीएम को झूठा बताने पर मनोहर लाल ने कड़ा जवाब दिया कि ऐसा भाषा अशोभनीय है। 

दिल्ली कूच को लेकर किसानों की सिंघु व टीकरी बार्डर पर मोर्चेबंदी रविवार को तीसरे दिन भी जारी रही। हरियाणा, पंजाब व राजस्थान से आये हजारों की संख्या में किसान सिंघु व टीकरी बार्डर पर बैठे रहे। केंद्रीय गृह मंत्री के प्रस्ताव को लेकर किसान संगठनों ने दो बार मंथन किया। दोनों बार लंबे दौर की बैठक में फैसला लिया गया कि किसान दिल्ली नहीं जाएंगे और यहीं बैठकर अपनी लड़ाई लड़ेंगे। सिंघु व टीकरी बार्डर पर किसानों के धरने से दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 तथा टीकरी बार्डर बहादुरगढ़ की ओर से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद है। यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थिति ज्यादा बदतर है, यहां 10 से 15 किलोमीटर लंबा जाम है, जिसमें हजारों की संख्या में ट्रक फंसें हुए हैं, जिनमें दूध, फल व सब्जियां हैं।

भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि किसान अब दिल्ली नहीं जाएंगे। दिल्ली जाने वाले सभी रास्तों को बंद किया जाएगा। सरकार से अब बिना शर्त बातचीत होगी और वह भी धरना स्थल पर ही होगी। किसान नेता बलबीर सिंह ने कहा कि किसानों को एमएसपी की गारंटी के साथ फसल बिक्री पर भी एमएसपी चाहिए। वे अपनी मांगों को मंगवाने के लिए दिल्ली सीमा पर ही डटे रहेंगे, चाहे उन्हें कितना ही समय क्यों न लगे। 

इसके साथ ही भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने भी स्पष्ट किया कि किसानों का दिल्ली जाने का कोई इरादा नहीं है। सरकार ने पहले डंडे मारे, फिर पानी की बौछारें और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आंदोलन चल रहा है। तीनों कानून रद्द हों, बिजली बिल, एमएसपी गारंटी कानून लाया जाए, ये किसानों की प्रमुख मांग है। दादरी से विधायक व सांगवान खाप के प्रधान सोमबीर सांगवान ने कहा कि खाप पंचायतें किसानों के समर्थन में सोमवार को दिल्ली कूच करेंगी।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हरियाणा के किसान कई महीने से आंदोलनरत हैं। वो बार-बार सरकार से इन क़ानूनों को वापस लेने या एमएसपी का क़ानून बनाने की गुहार लगा चुके हैं।  हुड्डा ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि क्या वो आंदोलनकारी किसानों को हरियाणा वासी नहीं मानते? इसके साथ ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने प्रदेश में दस हजार से ज्यादा किसानों पर दर्ज एफआईआर तुरंत वापस लेने और गिरफ्तार किसानों को तुरंत रिहा करने की मांग की है।

आंदोलन पर नहीं थम रही है सियासत
उधर, किसान आंदोलन पर सियासत थम नहीं रही है। प्रदेश के गृह मंत्री ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों के कंधे का दुरुपयोग कर अपनी चुनावी इंजीनियरिंग चलाना चाह रहे हैं। हरियाणा के जो कांग्रेस नेता इन किसानों की भावनाओं का दोहन करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने आरोप लगाया कि दिल्ली कूच कर रहे किसान नहीं कांग्रेस के कार्यकर्ता है और ये पंजाब कांग्रेस का प्रायोजित कार्यक्रम है।

फोन कॉल विवाद को लेकर हरियाणा व पंजाब सीएम आमने-सामने
किसान आंदोलन को लेकर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री आमने-सामने हो गए हैं। दोनों के बीच फोन कॉल का विवाद गहराता जा रहा है। पंजाब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने हरियाणा मुख्यमंत्री को झूठा कह दिया। इस पर हरियाणा मुख्यमंत्री के पर्सनल सेक्रेटरी अभिमन्यु सिंह ने सोशल मीडिया पर कॉल रिकॉर्ड पोस्ट कर दी। अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कैप्टन को करारा जवाब दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि हरियाणा के मुख्यमंत्री झूठ बोल रहे हैं कि उन्होंने कॉल किया और मैंने उन्हें जवाब नहीं दिया। इसके पलटवार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी करार जवाब दिया और कहा कि एक मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती।

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