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वीडियो : मन की बात में पीएम मोदी ने भारतीय वैज्ञानिकों को किया याद, गोबर और कचरे को आय का स्त्रोत बनाने की अपील

संजीवनी टुडे 25-02-2018 18:59:12

नई दिल्ली। (जेएनएन)। आज पीएम मोदी ने मन की बात के जरिए जनता को संबोधित किया है। महान भौतिक शास्त्री और भारत रत्न सर सी.वी. रमन को याद करते हुए पीएम मोदी ने की मन के बात की शुरूआत की। यह कार्यक्रम का 41वां संस्करण है।

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भारतीय वैज्ञानिकों कि किया याद
पीएम मोदी ने मन की बात में भारतीय वैज्ञानिक सीवी रमन और जगदीशचंद्र बोस की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने कहा, 'मुझे विज्ञान को लेकर कई साथियों ने प्रश्न पूछे हैं।  कुछ-न-कुछ लिखते रहते हैं। हमने देखा है कि समुन्दर का रंग नीला नज़र आता है लेकिन हम अपने दैनिक जीवन के अनुभवों से जानते हैं कि पानी का कोई रंग नहीं होता है। क्या कभी हमने सोचा है कि नदी हो, समुन्दर हो, पानी रंगीन क्यों हो जाता है ? यही प्रश्न 1920 के दशक में एक युवक के मन में आया था। इसी प्रश्न ने आधुनिक भारत के एक महान वैज्ञानिक को जन्म दिया। जब हम विज्ञान की बात करते हैं तो सबसे पहले भारत-रत्न सर सी.वी. रमन का नाम हमारे सामने आता है। उन्हें लाइट स्कैटरिंग  यानि प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिए नोबल-पुरस्कार प्रदान किया गया था। उनकी एक ख़ोज ‘रमन  इफ़ेक्ट’ के नाम से प्रसिद्ध है। डॉ. सीवी रमन प्रकाश को प्रकीर्णन (स्कैटरिंग) के लिए नोबेल प्राइज दिया गया। 28 फरवरी को ही उन्होंने ये खोज की थी। इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।'


गोबर और कचरे को आय का स्त्रोत भी बनाएं
पीएम ने कहा कि पशुओं के अपशिष्ट के इस्तेमाल की योजना को गोबरधन योजना नाम मिला। मवेशियों के गोबर, कृषि से निकलने वाले कचरे, रसोई घर से निकलने वाला कचरा, इन सबको बायोगैस आधारित उर्जा बनाने के लिए इस्तेमाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ‘गोबर धन योजना’ के तहत ग्रामीण भारत में किसानों, बहनों, भाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वो गोबर और कचरे को सिर्फ वेस्ट के रूप में नहीं बल्कि आय के स्रोत के रूप में देखें। ‘गोबर धन योजना’ से ग्रामीण क्षेत्रों को कई लाभ मिलेंगे। गांव को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी। पशु-आरोग्य बेहतर होगा और उत्पादकता बढ़ेगी। बायोगैस से खाना पकाने और लाइटिंग के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। किसानों एवं पशुपालकों को आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।  वेस्ट कलेक्शन,ट्रांसपोर्टेशन , बायोगैस की बिक्री आदि के लिए नई नौकरियों के अवसर मिलेंगे। ‘गोबर धन योजना’ के सुचारू व्यवस्था के लिए एक ऑनलाइन  ट्रेडिंग प्लेटफार्म  भी बनाया जाएगा जो किसानों को खरीदारों से कनेक्ट  करेगा ताकि किसानों को गोबर और एग्रीकल्चर  वास्ते  का सही दाम मिल सके। मैं उद्यमियों, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में रह रही अपनी बहनों से आग्रह करता हूँ कि आप आगे आयें। सेल्फ  हेल्प  ग्रुप  बनाकर, सहकारी समितियां बनाकर इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं। मैं आपको आमंत्रित करता हूँ क्लीन एनर्जी  और ग्रीन जॉब्स के इस आन्दोलन के भागीदार बनें। अपने गाँव में वेस्ट को वेल्थ  में परिवर्तन करने और गोबर से गोबर-धन बनाने की दिशा में पहल करें। 

 

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