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उपराष्ट्रपति ने "40 ईयर विद अब्दुल कलाम-अनटोल्ड स्टोरी" पुस्तक का किया लोकार्पण

संजीवनी टुडे 03-12-2020 15:21:22

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लें


नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लें और एक सशक्त, समावेशी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए भरसक प्रयास करें। उन्होंने युवाओं से कहा कि डॉ. कलाम की तरह वे भी देश के सामने विभिन्न सामाजिक आर्थिक समस्याओं के लिए नई सोच के साथ नए समाधान निकालें।

अब्दुल कलाम की अनसुनी कहानी पर आधारित डॉ. शिवतानु पिल्लई द्वारा लिखी पुस्तक "40 ईयर विद अब्दुल कलाम – अनटोल्ड स्टोरी " का वर्चुअल लोकार्पण करते हुए वेंकैया ने कहा डा कलाम के जीवन से सन्देश मिलता है कि सही परिपेक्ष्य में विश्लेषण करने पर, विफलताएं भी एक सफल जीवन, धवल चरित्र और स्वस्थ विचार शैली के लिए आवश्यक होती हैं।

प्रवासी मजदूरों पर कोविड-19 के गंभीर प्रभावों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आवश्यकता है कि गावों और छोटे कस्बों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अधिकाधिक नए अवसर पैदा किए जाएं। इसके लिए स्थानीय निकायों द्वारा विकेंद्रीकृत स्थानीय नियोजन, उनके प्रशिक्षण, बड़ी संख्या में कुटीर उद्योग लगाने की आवश्यकता होगी जिससे हर गांव कस्बा प्रगति के केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

महामारी के दौरान हमारे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नए इन्नोवेशन पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जिस भारत के पास एक भी पीपीई किट का उत्पादन क्षमता नहीं थी वो आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पीपीई किट निर्माता देश बन गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियों को अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में भी दोहराने की जरूरत है तभी "आत्मनिर्भर भारत" का डा कलाम का स्वप्न साकार होगा जिन्होंने रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को आत्म निर्भर बनाने के लिए अपना जीवन ही समर्पित कर दिया।

डा कलाम के साथ अपने निजी अनुभव साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि पहले डीआरडीओ के अध्यक्ष के रूप में फिर भारत के राष्ट्रपति के रूप में भी, डा कलाम से कई अवसरों पर बातचीत करने का अवसर मिला। उनमें आम नागरिक के जीवन में सुधार लाने के लिए कुछ कारगर प्रयास करते रहने की बड़ी सच्ची ललक रहती थीं।

डा कलाम को सच्चा कर्मयोगी बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे हर भारतीय के लिए प्रेरणा के स्रोत थे, वे सही मायनों में "जनता के राष्ट्रपति" थे जिन्हें हर भारतीय आदर और सम्मान करता था। वे निष्ठा, सादगी ज्ञान की प्रतिमूर्ति थे। भारत की रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। अंतरिक्ष अनुसंधान में उनके योगदान के सम्मान में, नासा ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पाए गए नए जीवाणु का नाम ही डा कलाम के नाम पर रख दिया है।

पर्यावरण संरक्षण पर डा कलाम के विचारों की चर्चा करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने बार बार हमें याद दिलाया था कि सम्पूर्ण सौर मंडल में हमारे पास सिर्फ एक ही ग्रह है जिस पर जीवन का अस्तित्व है। हमारा दायित्व है कि हम पृथ्वी की रक्षा करें और भावी पीढि़यों के लिए भी जीने योग्य बनाएं रखें। उपराष्ट्रपति ने कहा कि समय की मांग है कि हम डा कलाम के विचारों को समझें उनका पालन करें तथा सतत प्रगति के लिए एक पर्यावरण सम्मत पद्धति को अपनाएं। इसके लिए हमारे वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता कम ऊर्जा का प्रयोग करने वाली, स्वच्छ और सस्ती नई टेक्नोलॉजी को खोजें।

इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डा शिवतानु पिल्लई, प्रो डा वाई एस राजन तथा पेंटागन प्रेस के राजन आर्या ने भी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

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