संजीवनी टुडे

वाराणसी में मोदी को रिकार्ड मतों से जिताने की कवायद

संजीवनी टुडे 18-05-2019 17:55:48


वाराणसी।  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वाराणसी संसदीय क्षेत्र से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बार के लोकसभा चुनाव में रिकार्ड मतों से जिताने की फिराक में है। इसके लिए पिछले करीब दो माह से कवायद चल रही है। रविवार को वाराणसी समेत पूर्वांचल की 13 सीटों पर आखिरी दौर का मतदान होना है।प्रधानमंत्री मोदी ने पिछला चुनाव वाराणसी से ही लड़ा था। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रुप में वह चुनाव मैदान में थे, लेकिन इस बार मोदी प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए काशी के सियासी रण में हैं। 

पिछले चुनाव में मोदी के मुकाबले तत्कालीन सियासत के नये चेहरे और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीबाल आम आदमी पार्टी से थे, लेकिन जब मतों की गणना हुई थी तो केजरीवाल बहुत पीछे रहे। मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले हैं, जबकि दूसरे स्थान पर रहे केजरीवाल को 2,09,238 मत मिले थे। इस तरह मोदी 3,71,784 मतों से चुनाव जीते थे। उस बार कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय को मात्र 75,614 वोट मिले थे और वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये थे। बसपा और सपा उम्मीदवारों की भी जमानत जब्त हो गयी थी। बसपा से चुनाव मैदान में उतरे विजय प्रकाश जायसवाल चैथे स्थान पर रहे और उन्हें 60,579 मत मिले थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी, लेकिन इस दल के उम्मीदवार कैलाश चैरसिया 45,291 मतों के साथ पांचवें स्थान पर रहे।
इस बार प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन है। गठबंधन की तरफ से सपा ने शालिनी यादव मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस की तरफ से अजय राय एक बार फिर मोदी के सामने ताल ठोके हुए हैं। ऐसे में भाजपा प्रधानमंत्री मोदी की वाराणसी सीट से ऐतिहासिक और रिकार्ड मतों से जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। इसके लिए पार्टी ने चुनाव की घोषणा से पहले ही कवायद तेज कर दी थी। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी 26 अप्रैल को नामांकन के बाद दोबारा वाराणसी नहीं आये। नामांकन से एक दिन पहले 25 अप्रैल को उन्होंने वाराणसी में ऐतिहासिक रोड शो भी किया था। उसी दिन उन्होंने अपने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी काशीवासियों को सौंप दी थी। उनके नामांकन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का पूरा कुनबा भी शरीक हुआ था। 
मोदी को रिकार्ड मतों से जिताने के लिए भाजपा ने करीब बीस हजार पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की लम्बी फौज तैयार की है, जो रात दिन रणनीति बनाने और उसे क्रियांवित करने में जुटे रहे। भाजपा के इस संगठनीय ढांचे में 1819 बूथ कमेटी, 226 सेक्टर कमेटी और 17 मंडल यूनिट शामिल है। 
 
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी लगातार पूरी रणनीति की माॅनीटरिंग करते रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले कई माह से वारणसी के लगातार दौरे पर रहे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा0 महेंद्र नाथ पाण्डेय और केंद्र व प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार के दौरान काशी में प्रवास किया। प्रदेश सरकार के सूचना राज्य मंत्री और वाराणसी दक्षिण क्षेत्र से विधायक डा0 नीलकंठ तिवारी तो पिछले दो माह से वाराणसी में ही कैंप किये हुए हैं और एक-एक मुहल्ले में जाकर स्थानीय लोगों के साथ प्रतिदिन दो से तीन बैठकें किये। 

 

उधर, मोदी को कड़ी टक्कर देने के लिए गठबंधन और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के दौरान कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन सियासी समीक्षकों का मानना है कि इस बार के चुनाव में वाराणसी सीट पर विपक्ष भी मोदी के सामने नतमस्तक दिख रहा है। लगता है चुनाव से पहले ही सब हार मान चुके हैं। शायद इसीलिए कांग्रेस ने भी ऐन वक्त पर अजय राय को फिर से चुनावी मैदान में उतारकर अपने तुरुप के पत्ते को बेवजह खर्च होने से बचा लिया। करीब डेढ़ माह पहले कांग्रेस ने कुछ हिम्मत जुटाई थी और वाराणसी से प्रियंका गांधी को उतारकर मोदी को चुनौती देने का संकेत दिया था, लेकिन आखिर समय में उसने अपने पैर पीछे खींच लिए। सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन भी इस सीट पर अपने को पहले ही लड़ाई से बाहर मान चुका है। हलांकि गठबंधन की तरफ से सपा ने यहां से शालिनी यादव को उतारा है लेकिन मोदी के खिलाफ वह बहुत ही कमजोर उम्मीदवार मानी जा रही हैं। शालिनी यादव पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता श्यामलाल यादव की पुत्रवधू हैं। हाल ही में सपा में शामिल हुई हैं। पूर्व में कांग्रेस के टिकट से उन्होंने वाराणसी से ही महापौर का चुनाव लड़ा था, लेकिन बड़ी मुश्किल से जमानत बचा पाईं थीं। हालांकि, बीच में सपा ने बीएसएफ के बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उनका पर्चा खारिज होने पर शालिनी यादव पर ही विशस जताया है। गठबंधन की तरफ से सपा मुखिया अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने रैली भी की और कांग्रेस महामंत्री प्रियंका गांधी ने रोड शो किया लेकिन चुनावी पंडितों को वाराणसी की लड़ाई एकतरफा नजर आ रही है। काशी के युवा वैभव कपूर इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी की जीत नहीं बल्कि जीत के अंतर की बात करिये। वहीं युवा नेता अरुण चैबे बड़े आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि मोदी इस बार यहां से जीत का सारा रिकार्ड तोड़ेंगे। 

 

 

पूर्वांचल की कई सीटों को भी प्रभावित करता है काशी
सियासी समीक्षकों का मानना है कि वाराणसी का चुनावी समीकरण पूर्वांचल के करीब दो दर्जन लोकसभा सीटों को प्रभावित करता है। साथ ही यहां से बिहार की भी कई सीटों को साधा जाता है। लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चन्दौली, वाराणसी, मिर्जापुर तथा राबटर््सगंज सीटों के लिए 19 मई को मतदान होगा। ये सभी सीटें पूर्वांचल की हैं। वर्ष 2014 के चुनाव में इन सभी 13 सीटों पर भाजपा व उसके सहयोगी दल का कब्जा था। 12 सीटें भाजपा को मिली थीं और मीरजापुर सीट से उसकी सहयोगी अपना दल की अनुप्रिया पटेल जीती थीं। उस चुनाव में पूर्वांचल की इन सीटों से सपा, बसपा और कांग्रेस का सफाया हो गया था। 
 
सातवें चरण की इन 13 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की कुल संख्या 2.32 करोड़ है, जिनमें 1.26 करोड़ पुरूष, 1.06 करोड़ महिला तथा 1416 तृतीय लिंग के मतदाता हैं। इस चरण के जनपदों में 18 से 19 वर्ष के 2,19,473 युवा मतदाता तथा 80 वर्ष से अधिक के 3,77,515 मतदाता हैं। इन 13 लोक सभा निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 13,979 मतदान केन्द्र तथा 25,874 मतदेय स्थल हैं। 
 
काशी का मिजाज भी है अलग
चुनाव को लेकर देश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी का मिजाज भी औरों से इतर है। यहां के मतदाता ‘पैराशूट प्रत्याशी’ को खूब मौका देते हैं। शायद इसीलिए श्रीशचंद दीक्षित, चंद्रशेखर सिंह और डा0 मुरली मनोहर जोशी से लेकर नरेंद्र मोदी तक को यहां के लोगों ने बड़े प्यार से अपना नेतृत्व सौंपा। हालांकि आजादी के बाद काफी समय तक यहां के चुनाव में कांग्रेस का बोलबाला रहा। वर्ष 1967 में एक बार कम्यूनिस्टों ने भी यहां चुनाव जीता। लेकिन, 1991 से एक चुनाव को छोड़कर यहां भाजपा लगातार चुनाव जीतती आ रही है। वाराणसी लोकसभा सीट के अंतर्गत पांच विधानसभा सीटें वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी छावनी, सेवापुरी और रोहनिया शामिल हैं। यहां मतदाताओं की संख्या करीब 18 लाख है।

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब बटन

ये हैं अब तक के सांसद

1952 - कांग्रेस के रघुनाथ सिंह 
1957 - कांग्रेस के रघुनाथ सिंह 
1962 - कांग्रेस के रघुनाथ सिंह 
1967 - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सत्य नारायण सिंह
1971 - कांग्रेस के राजाराम शास्त्री 
1977 - इंडियन नेशनल लोकदल के चंद्रशेखर
1980 - कांग्रेस के कमलापति त्रिपाठी 
1984 - कांग्रेस के श्यामलाल यादव 
1989 - जनता दल के अनिल शास्त्री 
1991 - भाजपा के श्रीश चंद्र दीक्षित 
1996 - भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल 
1998 - भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल 
1999 - भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल 
2004 - कांग्रेस के राजेश कुमार मिश्रा 
2009 - भाजपा के डा0 मुरली मनोहर जोशी 
2014 - भाजपा के नरेंद्र मोदी  

मात्र 240000/- में टोंक रोड जयपुर में प्लॉट 9314166166

More From national

Trending Now
Recommended