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उत्तराखंडः 40 वर्षों का इन्तजार खत्म, रक्षा मंत्री ने IMA में 2 अंडरपास का किया वर्चुअल शिलान्यास

संजीवनी टुडे 28-09-2020 22:30:26

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी के निकट अंडरपास की मांग दशकों से चली आ रही थी लेकिन अब जाकर इस पर कार्य शुरू हुआ है।


देहरादून। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी परिसर (आईएमए) में 44.21 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले क्रमश 354.45 मीटर तथा 407.34 मीटर लम्बे दो अंडरपास का शिलान्यास किया। 

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी के निकट अंडरपास की मांग दशकों से चली आ रही थी लेकिन अब जाकर इस पर कार्य शुरू हुआ है। अंडरपास के बनने से एनएच-72 पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि आईएमए जैसे विश्वसनीय, विश्वस्तरीय संस्थान को दो अंडरपास के लिए इतना लम्बा इंतजार किया जाना बड़ी विडम्बना है। अंडरपास निर्मित होने के बाद आईएमए के कैम्पस आपस में जुड़ सकेंगे तथा संस्थान को अपनी गतिविधियों के संचालन में सुविधा होगी। इन अंडरपास के निर्माण से न केवल उत्तराखण्ड की जनता को, बल्कि, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा आने-जाने वाले यात्रियों को भी बड़ा लाभ होगा। साथ ही कैडेट्स के आवागमन और ड्रिल में भी व्यवधान नहीं होगा।
      
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष दिसम्बर में आईएमए पासिंग आउट परेड में उन्होंने इसकी स्वीकृति प्रदान की थी। उन्होंने कहा कि यदि दो साल की बजाय पौने दो साल में ये अंडर पास बनकर तैयार हो जायेंगे तो वे इनके उद्घाटन के लिए भी आयेंगे तथा इसमें कार्य करने वालों को सम्मानित भी करेंगे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि नीयत ठीक हो, संकल्प पक्का हो तो किसी भी कार्य को पूर्ण करने में कठिनाई पैदा नहीं होती है। उन्होंने कहा कि देरहादून में ट्रैफिक बढ़ रहा है, इस दृष्टि से भी इन अंडर पास की नितांत जरूरत महसूस की जा रही थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि 1978 से इसकी आवश्यकता महसूस की जाती रही है। गत वर्ष पासिंग आउट परेड के अवसर पर इन अंडरपास के महत्व पर केन्द्रीय मंत्री से उनके द्वारा चर्चा करने पर उन्होंने इसकी घोषणा की थी, जो आज साकार हो रही है। इसके लिए आवश्यक धनराशि 44.21 करोड़ की भी स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष आई.एम.ए. के दीक्षान्त समारोह के अवसर पर राज्य सरकार को भी सुरक्षा आदि की चिन्ता रहती थी। अब सैन्य अधिकारियों को आईएमए की गतिविधियों के संचालन में सुविधा होगी तथा स्थानीय लोगों को भी आवागमन में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षात्मक कारणों पर भी चिन्ता कम हो जायेगी। उन्होंने इसे न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि आम जनता के हित में सुकून भरा निर्णय बताया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विश्वस्तरीय सैन्य प्रशिक्षण संस्थान से तैयार होने वाले जांबाज योद्धाओं ने अपनी वीरता और पराक्रम से देश की सुरक्षा एवं सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखा है। जाहिर है इस महान उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कठोर प्रशिक्षण की आवश्यकता है और प्रशिक्षण के लिए संसाधनों व सुविधाओं का होना भी उतना ही जरूरी होता है।

इस अवसर पर आईएमए के समादेशक ले. जनरल जयवीर सिंह नेगी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे आईएमए का नार्थ, सैन्ट्रल तथा साउथ क्षेत्र आपस में जुड़ जायेगा तथा एनएच एवं लोक निर्माण विभाग की सड़क पर यातायात सुचारू रूप से संचालित हो सकेगा।
 
इस अवसर पर ले. जनरल केके खन्ना, मेजर जनरल आरएस ठाकुर, ब्रिगेडियर सुजीत नारायण, मुख्य सचिव ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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