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Unlock-1/ इस्लामिक सेंटर ने जारी की नई एडवायजरी, चेयरमैन बोले- 6 फीट का रखे फासला और न मिले गले

संजीवनी टुडे 01-06-2020 22:32:52

केंद्र के फैसले के मद्देनजर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने सोमवार को नई एडवायजरी जारी की, इसमें मस्जिदों से कालीन हटाने, नमाजियों को मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने को कहा गया है।


नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। लॉकडाउन 5.0 के अनलॉक-1 के तहत केंद्र सरकार ने 8 जून से सभी धार्मिक स्थलों को खोलने की अनुमति दे दी है, इसमें मस्जिदें भी शामिल हैं। केंद्र के फैसले के मद्देनजर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने सोमवार को नई एडवायजरी जारी की, इसमें मस्जिदों से कालीन हटाने, नमाजियों को मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने को कहा गया है। एडवायजरी में नमाज के दौरान 6 फीट का फासला रखने और गले ना मिलने की हिदायत भी दी गई है।

Only 5 people will offer Namaz Urs postponed in Masjid or Idgah

नई एडवायजरी में कहा गया कि 10 साल से छोटे बच्चे और 65 साल से ऊपर के बुजुर्ग घर पर ही नमाज अदा करें, मस्जिदों में जाने से बचें। इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने एडवायजरी जारी करते हुए कहा कि इस एडवायजरी के बाद 15 दिन तक हालात पर नजर रखी जाएगी। अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा एडवायजरी जारी की जा सकती है।

मस्जिदों में नमाज के लिए 14 प्वाइंट की एडवायजरी
-नमाज मास्क लगाकर ही अदा की जाए।
-नमाज के दौरान नमाजियों के बीच 6 फीट का फासला होना चाहिए।
-मस्जिदों से चटाइयां और कालीन हटा दिए जाएं। हर नमाज से पहले फर्श फिनायल या डेटॉल से साफ किया जाए। फर्श पर ही नमाज पढ़ी जाए।
-जुमे की नमाज के लिए भी यही व्यवस्था की जाए। लोगों को 4 हिस्सों में बांट दिया जाए।
-मस्जिदों में किसी भी समय भीड़ ना जमा होने दें।
-वुजूखाने में साबुन रखा जाए और वुजू करते वक्त साबुन से हाथ धोना जरूरी है।
-मस्जिदों में रखी हुई टोपियों का इस्तेमाल ना किया जाए। नमाजी घर से ही अपनी टोपी लेकर जाएं।
-10 वर्ष से कम और 65 वर्ष से आयु वाले मस्जिदों में ना जाए। वे घर पर नमाज अदा करें।
-मस्जिदों में फर्ज की नमाज अदा की जाए। सुन्नतें और नफल लोग घर पर अदा करें।
-मस्जिदों में हर नमाज के वक्त लोगों को 4 हिस्सों में बांटा जाए। 15-15 मिनट के अंदर ये लोग नमाज अदा करें। इस दौरान पहले हिस्से में नमाज तय समय पर खत्म की जाए ताकि बाद में नमाज पढ़ने वाले लोगों को दिक्कत ना हो।
-जुमे का खुतबा छोटा कर दिया जाए। उर्दू में तकरीर न की जाए।
-वुजू घर से करके ही लोग मस्जिदों में जाएं।  
-मस्जिदों में दाखिल होते वक्त और बाहर आते वक्त भीड़ ना लगाई जाए।
-मस्जिदों में ना तो किसी से गले मिलें और ना ही किसी से हाथ मिलाएं।

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