संजीवनी टुडे

एनी डेस्क एप के जरिए खाते से रुपये उड़ाने वाले दो साइबर अपराधी गिरफ्तार

संजीवनी टुडे 03-07-2019 19:29:18

रांची पुलिस ने एनी डेस्क ऐप के माध्यम से 25 हज़ार रुपये की ठगी करने के मामले में दो साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है।


रांची। रांची पुलिस ने एनी डेस्क ऐप के माध्यम से 25 हज़ार रुपये की ठगी करने के मामले में दो साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार साइबर अपराधियों में विवेक कुमार मंडल और आमिर खुसरो शामिल हैं। उनके पास से 20 पेटीएम कार्ड, 20 फर्जी सिम कार्ड, पांच मोबाइल और 15 हजार 100 रुपये बरामद किये गये हैं। एसएसपी अनीश गुप्ता ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अकाउंट से पैसे निकालने के बाद साइबर सेल को घटना की सूचना दी गई। साइबर सेल ने इस मामले का खुलासा करने के लिए तकनीकी मदद ली। जांच के क्रम में पाया कि उज्जवल उर्फ विवेक कुमार मंडल के पेटीएम के खाते में पैसे का अनधिकृत हस्तांतरण हुआ है। सूचना के बाद एक विशेष टीम का गठन करते हुए छापेमारी शुरू की गई। छापेमारी के क्रम में गुप्त सूचना के आधार पर इंटर स्टेट साइबर अपराध गिरोह के जामताड़ा जिला के फतेहपुर से उज्जवल उर्फ विवेक कुमार मंडल को गिरफ्तार किया गया। 

उसके पास से पेटीएम कार्ड और सिम कार्ड बरामद हुआ। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकारते हुए बताया कि देवघर जिला के पलाजोरी निवासी अमीर खुसरो ने छह हजार रुपये में एक सिम और पेटीएम का कार्ड उपलब्ध कराया है। वह स्वयं अन्य साइबर अपराधियों को आठ हजार रुपये में एक सिम और पेटीएम का कार्ड उपलब्ध कराता है। उज्जवल उर्फ विवेक कुमार मंडल की सूचना पर साइबर अपराधी आमिर खुसरो को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से भी भारी मात्रा में पेटीएम कार्ड और सिम कार्ड बरामद किये गये। उसने पूछताछ में बताया कि कोलकाता के रहने वाले साइबर अपराधी सुशांत दास के माध्यम से सिम और पेटीएम कार्ड उसे प्राप्त हुए थे। गिरफ्तार अपराधियों ने इस पूरे साइबर अपराध में शामिल पेटीएम कर्मी और मोबाइल सिम विक्रेताओं सहित अन्य अपराध कर्मियों के बारे में भी विस्तृत रूप से जानकारी दी है। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। फरार अपराधियों में गिरोह का मास्टरमाइंड कोलकाता निवासी सुशांत दास, देवघर निवासी शमीम अंसारी, फरीद अंसारी और वसीम अंसारी शामिल हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए एसआईटी टीम लगातार छापेमारी कर रही है। छापेमारी टीम में साइबर सेल डीएसपी यशोधरा, नीतीश कुमार, सुनील कुमार पांडेय, दीपक कुमार, संदीप कुमार, कमलेश ठाकुर और विफे उरांव सहित सशस्त्र बल शामिल थे। 

कैसे करते थे ठगी
एसएसपी ने बताया कि साइबर अपराधी स्वयं को बैंक का अधिकारी बताकर केवाईसी, आधार और एटीएम एक्टिवेट कराने के नाम पर एनी डेस्क एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करा कर पीड़ित के मोबाइल को रीमोटली संचालित करते हैं। इसके बाद मोबाइल पर बैंक द्वारा भेजे जाने वाले सभी ओटीपी को वह बड़ी ही आसानी से देख पाते हैं। इसमें साइबर अपराधी को ओटीपी पूछने की जरूरत नहीं पड़ती है क्योंकि एनी डेस्क रिमोट कंट्रोल एप्लीकेशन है। आरबीआई द्वारा भी एनी डेस्क एप से हो रहे साइबर अपराध के बारे में इसी वर्ष जनवरी 2019 में एक एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी में एनीडेस्क ऐप को कोई उपभोक्ता किसी के फोन से बताए जाने के बाद उसे अपने फोन में इंस्टॉल न करें। उन्होंने बताया कि कोई भी बैंक अधिकारी बनकर या इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बन कर फोन करता है और आप से अकाउंट के बारे में डिटेल मांगता है तो उसे अपना डिटेल न दें। उन्होंने कहा कि अगर किसी को भी इस तरह का फोन किया जाता है तो वह रांची पुलिस के वाट्सएप नंबर 89877 90672 पर संपर्क कर सकता है।  

क्या है पूरा मामला 
4 जून को रांची के कांके रोड के सत्या इंक्लेव निवासी सतेंद्र किशोर के मोबाइल पर फोन कर खुद को एसबीआई सीएमपीडीआई ब्रांच का मुख्य प्रबंधक अमित मिश्रा के नाम से परिचय देते हुए आधार नंबर अद्यतन कराने के नाम पर फोन किया गया। फोन करने वाले व्यक्ति ने योनो अकाउंट में इंटरनेट बैंकिंग का लॉगइन करने को कहा। इसके बाद साइबर अपराधी ने एनी डेस्क नाम का एप प्ले स्टोर से डाउनलोड करने को कहा तथा साथ ही ऑनलाइन एसबीआई एनीह्वेयर में लॉगिंग करने के लिए बोला। सतेंद्र किशोर के बैंक खाते से रजिस्टर मोबाइल नंबर पर लगातार एसबीआई के संदेश प्राप्त होते रहे। इसके बाद साइबर अपराधी ने सत्येंद्र को अपना प्रोफाइल पासवर्ड योनो एप पर साझा करने को कहा। प्रोफाइल पासवर्ड साझा करने के बाद साइबर अपराधी उनके अन्य बैंक खाते के बारे में पूछताछ करने लगा, तब सत्येंद्र को संदेह होने पर उन्होंने बैंक में जाकर शाखा प्रबंधक से मिलने की बात कही। इसके बाद साइबर अपराधी ने सतेंद्र को बैंक न आने का आग्रह किया। इसके बाद सत्येंद्र के खाते से 25 हजार रुपये आइएमपीएस के माध्यम से निकल गया। इस संबंध में सत्येंद्र के बयान पर गोंदा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

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