संजीवनी टुडे

भाजपा के खिलाफ प्रस्ताव पर माकपा और कांग्रेस ने दिया तृणमूल को झटका

संजीवनी टुडे 02-07-2019 22:40:45

पश्चिम बंगाल में बढ़ रही सांप्रदायिक हिंसा के पीछे कथित तौर पर भाजपा के होने को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा में प्रस्ताव लाने की योजना पर माकपा और कांग्रेस ने झटका दे दिया है।


कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बढ़ रही सांप्रदायिक हिंसा के पीछे कथित तौर पर भाजपा के होने को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा में प्रस्ताव लाने की योजना पर माकपा और कांग्रेस ने झटका दे दिया है। मंगलवार को विधानसभा में बिजनेस एडवाइजरी (बीए) कमेटी की बैठक में इन दोनों ही पार्टियों ने राज्य भर में इस तरह की हिंसा और माहौल के लिए राज्य प्रशासन की विफलता को जिम्मेवार ठहरा दिया है। इसके कारण भाजपा के खिलाफ संभावित प्रस्ताव की तृणमूल की योजना को झटका लगा है। 

दरअसल एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में राज्य के संसदीय कार्य और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा था कि राज्य भर में सांप्रदायिक हिंसा और मजहबी भेदभाव फैलाया जा रहा है। उन्होंने इशारे-इशारे में इसके लिए भाजपा को जिम्मेवार ठहराया था और इसके खिलाफ राज्य विधानसभा में प्रस्ताव लाने की बात भी कही थी। तब विधानसभा में माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक तथा नेता प्रतिपक्ष अब्दुल मन्नान ने भी पार्थ के सुर में सुर मिलाया था और इसके खिलाफ कदम उठाने की अपील की थी। इसके जवाब में पार्थ चटर्जी ने कहा था कि विधानसभा की धारा 185 के तहत मजहबी हिंसा के खिलाफ परिचर्चा के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाया जाएगा। उसके बाद मंगलवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस पर सहमति बनने की उम्मीद थी। 

विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी की अध्यक्षता में बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की जब बैठक हुई तो कथित सांप्रदायिक माहौल के खिलाफ चर्चा तो जरूर हुई लेकिन माकपा और कांग्रेस के विधायकों ने संयुक्त रूप से इसके लिए राज्य प्रशासन की विफलता को जिम्मेवार ठहराया और भाजपा के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा। इससे तृणमूल की ओर से शामिल हुए संसदीय कार्य और शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी उहापोह में पड़ गए थे। मजबूरन उन्हें माकपा और कांग्रेस के इस रुख का विरोध करना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के पीछे भाजपा ही है और सत्तारूढ़ पार्टी इसके खिलाफ अकेले प्रस्ताव लाएगी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि बीए कमेटी की अगली बैठक गुरुवार को होनी है उसी दिन इस प्रस्ताव के बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा।

विधायकों का हाजिरी भत्ता बढ़ाने का आवेदन

बीए कमेटी की बैठक में विधायकों ने हाजिरी भत्ता को बढ़ाने का भी आवेदन किया है। फिलहाल उन्हें विधानसभा में उपस्थिति के लिए 1000 रुपये मिलता है। इसे और अधिक बढ़ाने का आवेदन विधानसभा अध्यक्ष के पास किया गया है। उन्होंने इस पर सकारात्मक फैसला लेने का संकेत दिया है। बताया गया है कि पहले भी विधायकों के हाजिरी भत्ता बढ़ाने की मांग की गई थी लेकिन वित्त विभाग ने इसकी सहमति नहीं दी थी। अब एक बार फिर बीए कमिटी की ओर से राज्य वित्त विभाग के पास नए सिरे से सिफारिश भेजी जाएगी।

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बीए कमेटी की बैठक में संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने इस बात की भी आशंका जताई कि केंद्र में वर्तमान सत्तारूढ़ भाजपा सरकार राज्य की कई सरकार अनुमोदित कंपनियों को गैर सरकारी करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि बर्न स्टैंडर्ड, बीएसएनएल, बंगाल केमिकल, सांतरागाछी गवर्नमेंट इंडिया प्रेस और हुगली डक जैसी 10 सरकारी कंपनियों को गैर सरकारी करने की ओर आगे बढ़ रही है। इसके खिलाफ तृणमूल विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने इस मामले पर माकपा व कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियों की एकजुटता का भी आह्वान किया। हालांकि भाजपा ने इस मामले में पहले ही साफ कर दिया है कि तृणमूल के इस प्रस्ताव की खिलाफत करेगी। पार्थ चटर्जी ने स्पष्ट किया कि विधानसभा के मानसून सत्र में ही इससे संबंधित प्रस्ताव लाया जाएगा।

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