संजीवनी टुडे

ऐसे हुई थी जेट एयरवेज की शुरुआत, ऐसा रहा 25 सालों का सफर

संजीवनी टुडे 17-04-2019 22:33:32


नई दिल्ली। आखिरकार जिसका डर था वही हुआ देश के निजी क्षेत्र की बड़ी विमानन कंपनी जेट एयरवेज के साथ। करीब आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक के बोझ तले दबे जेट एयरवेज के सभी विमान अब जमीन पर ही रहेंगे। क्‍योंकि 400 करोड़ का एमरजेंसी फंड जारी करने से बैंकों के समूह ने इनकार किया है।

इसके बाद जेट एयरलाइन कंपनी ने बुधवार रात से परिचालन को अस्थायी रूप से अस्थगित कर दिया है।
दिसंबर 2018 तक कंपनी के बेड़े में 124 विमान थे, लेकिन अब छह ही विमान उड़ रहे थे। 25 साल पुरानी कंपनी आज भले ही गर्दिशों में हो, लेकिन एक समय बाजार में इसकी तूती बोलती थी। जेट एयरवेज के चेयरमैन पद से हाल ही में इस्तीफा देने को मजबूर हुए नरेश गोयल ने कभी टैक्सी एजेंसी के रूप में इसे शुरू किया था। आइए जानते हैं जेट एयरवेज के अब तक के सफर के बारे में... 

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ऐसे पड़ी थी जेट एयरवेज की नींव 
गरीब परिवार में जन्मे नरेश गोयल साल 1967 में महज 18 साल की उम्र में खाली हाथ दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने कनॉट प्लेस से संचालित होने वाली एक ट्रेवल एजेंसी ज्‍वाइन किया, जिसे उनके चचेरे नाना चला रहे थे। इस नौकरी से उन्हें प्रति माह करीब 300 रुपये मिलने लगे। बाद में वह ट्रेवल इंडस्ट्री में अपना पांव पसारने लगे और उनके दोस्तों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती गई। 
ये दोस्त खासकर जॉर्डन, खाड़ी और दक्षिण पूर्व एशिया आदि में विदेशी एयरलाइंस से थे। इस दौरान वह बहुत तेजी से एविएशन सेक्टर का पूरा व्यापार समझ गए। उन्हें टिकट की व्यवस्था से लेकर लीज पर एयरक्राफ्ट लेने तक की अच्छी समझ हो गई। 

साल 1973 में गोयल ने खुद की ट्रेवल एजेंसी खोल ली और जिसे उन्होंने जेट एयर का नाम दिया, लेकिन जब वह पेपर टिकट लेने एयरलाइन कंपनियों के दफ्तर जाया करते तो वहां लोग उनका यह कहकर मजाक उड़ाते थे कि अपनी ट्रेवल एजेंसी का नाम एयरलाइन कंपनी जैसी रखी है। इसके जवाब में गोयल कहा करते कि एक दिन वह खुद की एयरलाइन कंपनी भी जरूर खोलेंगे।
गोयल का यह सपना साल 1991 में पूरा हो गया जब उन्होंने एयर टैक्सी के रूप में जेट एयरवेज की शुरुआत कर दी। तब भारत में बिल्कुल संगठित तरीके से प्राइवेट एयरलाइंस के संचालन की अनुमति नहीं थी, जिसके एयरक्राफ्ट टाइम टेबल के मुताबिक उड़ान भरे, जैसा कि अब हो रहा है। एक साल बाद अपनी जेट ने चार जहाजों का एक बेड़ा बना लिया और जेट एयरक्राफ्ट की पहली उड़ान शुरू हो गई। 

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एविएशन इंडस्ट्री में गोयल का करियर शुरू से ही विवादों में रहा है, जब जेट की शुरुआती फंडिंग के स्रोतों पर सवाल उठे थे। एक सीनियर एयरलाइन ऑफिसर ने कहा कि 'उन्हें पसंद कर सकते हैं, उनसे नफरत हो सकती है, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जेट के रूप में भारत को पहला संगठित एयरलाइन नरेश गोयल ने दिया, जब देश के अंदर हवाई यात्रा का एक ही साधन सरकारी इंडियन एयरलाइंस थी। जेआरडी टाटा ने एयर इंडिया की स्थापना की थी, जो देश की सर्वोत्तम एयरलाइंस कंपनी थी, लेकिन जैसे ही सरकार ने इंडियन एयरलाइंस को अपने कब्जे में लिया, दशकों पुराने सरकारी नियम-कानून और कुप्रबंधन ने महाराजा को भिखारी में तब्दील कर दिया।

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... और डूबती गई जेट 
जेट को विदेशों के लिए उड़ाने भरने वाली एकमात्र कंपनी बनाने के लिए गोयल ने 2007 में एयर सहारा को 1,450 करोड़ रुपए में खरीद लिया। उस समय इस फैसले को गोयल की गलती के तौर पर देखा गया। तब से कंपनी को वित्तीय मुश्किलों से सही मायने में कभी छुटकारा नहीं मिल पाया। मामले से वाकिफ एक व्यक्ति ने कहा कि प्रोफेशनल्स पर भरोसा नहीं करना और कंपनी के संचालन में हमेशा अपना दबदबा रखना गोयल की दूसरी बड़ी गलती साबित हुई।

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जेट एयरलाइन का सफर 
1993- दो विमानों, बोइंग 737 और बोइंग 300 के साथ जेट एयरवेज की हुई लॉन्चिंग। 
2002- जेट ने घरेलू एयरलाइंस मार्केट में इंडियन एयरलाइंस को पीछे छोड़ा। 
2005- मार्च में जेट की शेयर बाजार में लिस्टिंग और कंपनी के 20 फीसदी शेयर बेचे। 1,100 रुपये का शेयर 1,155 रुपये में लिस्ट हुए, जिनसे गोयल को 8,000 करोड़ रुपये मिले। 
2006- जनवरी में एयर सहारा को करीब 2,250 करोड़ में खरीदा। जेट को 27 विमान मिले जिनके दम पर उसे 12 फीसदी मार्केट शेयर प्राप्त हुआ। कंपनी ने इंटरनेशनल उड़ानें भरनी शुरू कर दी। 
2007- 16 अप्रैल को एयर सहारा का नाम बदलकर जेटलाइट कर दिया गया। इन्हें सस्ते टिकट पर फुल सर्विस एयरलाइन के तौर पर चलाया जाने लगा।

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2008- अक्टूबर में जेट ने अपने 13 हजार कर्मचारियों में से 1,900 की छंटनी कर दी। बाद में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के हस्तक्षेप पर इन्हें दोबारा नौकरी पर रखा गया।
2012- जुलाई महीने में जेट डोमेस्टिक मार्केट शेयर के मामले में इंडिगो से पिछड़ गई। 
2013- नवंबर में यूएई के एतिहाद एयरलाइंस ने जेट का 24 फीसदी शेयर खरीद लिया, गोयल के पास 51 फीसदी हिस्सेदारी रही। 
साल 2018 - 
12 नवंबर को जेट को तीसरी बार तिमाही नुकसान हुआ। 
22 नवंबर को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर रंजन मथाई ने इस्तीफा दे दिया। 
दिसंबर में जेट ने अपने पायलटों को अप्रैल तक उनकी बकाया सैलरी चुकाने का आश्वासन दिया। 
साल 2019 - 

MUST WATCH & SUBSCRIBE

जनवरी में जेट ने बैंकों की ईएमआई नहीं भरी। कंपनी की रेटिंग गिरी।
14 फरवरी को जेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने फंडिंग पाते रहने के लिए बैंकों को सबसे बड़ा शेयर धारक बनाने का फैसला किया।
15 फरवरी को जेट ने शेयरधारकों से 84 करोड डॉलर (करीब 5,880 करोड़ रुपये) का बेलआउट पैकेज मांगा। 
21 फरवरी को शेयर होल्डर्स ने कर्ज को इक्विटी में तब्दील करने की अनुमति दी। 
19 मार्च को गोयल ने एतिहाद से प्रमोटर कन्ट्रिब्यूशन के रूप में 750 करोड़ रुपये मांगे। एतिहाद ने कहा कि अगर उसे प्रति शेयर 150 रुपये मिल जाए तो वह जेट के अपने सारे शेयर ब

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