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प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा, कृषि सुधार कानून ने दी किसानों को ताकत

संजीवनी टुडे 29-11-2020 20:50:00

कनाडा से वापस आने वाली देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति के भारत लौटने की दी खुशखबरी


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम की की शुरुआत में देशवासियों के साथ खुशखबरी साझा किया। उन्होंने कहा कि देवी अन्नपूर्णा की एक बहुत पुरानी प्रतिमा, कनाडा से वापस भारत आ रही है। यह प्रतिमा, लगभग, 100 साल पहले, 1913 के करीब, वाराणसी के एक मंदिर से चुराकर, देश से बाहर भेज दी गयी थी। इसके लिए कनाडा की सरकार और इस पुण्य कार्य को सम्भव बनाने वाले सभी लोगों का इस सहृदयता के लिये आभार प्रकट किया।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में किसानों और युवाओं को लेकर कई बात कही। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कि बरसों से किसानों की जो माँग थी, जिन मांगों को पूरा करने के लिए किसी न किसी समय में हर राजनीतिक दल ने उनसे वादा किया था, वो मांगे पूरी हुई हैं। काफ़ी विचार विमर्श के बाद भारत की संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी स्वरूप दिया। इन सुधारों से न सिर्फ किसानों के अनेक बन्धन समाप्त हुये हैं , बल्कि उन्हें नये अधिकार भी मिले हैं, नये अवसर भी मिले हैं। इन अधिकारों ने बहुत ही कम समय में, किसानों की परेशानियों को कम करना शुरू कर दिया है। 

महाराष्ट्र के किसान को नए कानून से मिला लाभ
महाराष्ट्र के धुले ज़िले के किसान जितेन्द्र भाेइजी ने नये कृषि कानूनों का इस्तेमाल कैसे किया, ये आपको भी जानना चाहिये। जितेन्द्र भोइजी ने मक्के की खेती की थी और सही दामों के लिए उसे व्यापारियों को बेचना तय किया। फसल की कुल कीमत तय हुई करीब तीन लाख बत्तीस हज़ार रुपये। जितेन्द्र भाेइजी को पच्चीस हज़ार रूपये एडवांस भी मिल गए थे। तय ये हुआ था कि बाकी का पैसा उन्हें पन्द्रह दिन में चुका दिया जायेगा। लेकिन बाद में परिस्थितियां ऐसी बनी कि उन्हें बाकी का पेमेन्ट नहीं मिला। किसान से फसल खरीद लो, महीनों – महीनों पेमेन्ट न करो, संभवतः मक्का खरीदने वाले बरसों से चली आ रही उसी परंपरा को निभा रहे थे। इसी तरह चार महीने तक जितेन्द्र जी का पेमेन्ट नहीं हुआ। इस स्थिति में उनकी मदद की सितम्बर में जो नए कृषि क़ानून बने हैं , वो उनके काम आये। इस क़ानून में ये तय किया गया है कि फसल खरीदने के तीन दिन में ही, किसान को पूरा पेमेन्ट करना पड़ता है और अगर पेमेन्ट नहीं होता है तो किसान शिकायत दर्ज कर सकता है। 

एक महीने में करना होगा किसान की शिकायत का निपटारा
प्रधानमंत्री ने बताया कि कानून में एक और बहुत बड़ी बात है। इस क़ानून में ये प्रावधान किया गया है कि क्षेत्र के एसडीएम को एक महीने के भीतर ही किसान की शिकायत का निपटारा करना होगा। अब जब ऐसे कानून की ताकत हमारे किसान भाई के पास थी तो उनकी समस्या का समाधान तो होना ही था। उन्होंने शिकायत की और चंद ही दिन में उनका बकाया चुका दिया गया। यानि कि कानून की सही और पूरी जानकारी ही जितेन्द्र जी की ताकत बनी। क्षेत्र कोई भी हो, हर तरह के भ्रम और अफवाहों से दूर, सही जानकारी, हर व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा सम्बल होती है।

किसानों में जागरुकता बढ़ाने का ऐसा ही एक काम कर रहे हैं, राजस्थान के बारां जिले में रहने वाले मोहम्मद असलम जी। किसान उत्पादक संघ के सीईओ मोहम्मद असलम जी ने अपने क्षेत्र के अनेकों किसानों को मिलाकर एक वॉट्स एप ग्रुप बना लिया है। इस ग्रुप पर वो हर रोज़, आस-पास की मंडियों में क्या भाव चल रहा है, इसकी जानकारी किसानों को देते हैं। खुद उनका एफपीओ भी किसानों से फ़सल खरीदता है, इसलिए उनके इस प्रयास से किसानों को निर्णय लेने में मदद मिलती है। 

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