संजीवनी टुडे

गंगा की पौराणिकता लौटाने में गंगा समग्र के साथ आ रही देश की जनता

संजीवनी टुडे 26-11-2020 06:33:00

हिमालय से निकलने वाली गंगा विश्व की ऐसी नदी है जिसमें रोग दूर करने के गुण है।


कानपुर। हिमालय से निकलने वाली गंगा विश्व की ऐसी नदी है जिसमें रोग दूर करने के गुण है। आदिकाल से लोग गंगा जल पीकर निरोग रहते थे और 90 वर्ष पूर्व जयपुर के राजा गंगा सिंह गोलमेज सम्मेलन (लंदन) में पीने के लिए तीन कलश पानी ले गये थे। जिसको देख अंग्रेज अचंभित हुए और इसका राज पूछा तो राजा ने जानकारी दी। 

इस पर अंग्रेज अधिकारियों ने एक कलश पानी रखने का आग्रह किया और राजा ने दे दिया। उस कलश के पानी को लंदन म्यूजियम में रख दिया गया और 10 वर्ष पूर्व देखा गया तो उसी तरह निर्मल पाया गया, जिस पर शोध किया जा रहा है। यह बातें बुधवार को कानपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने गंगा समग्र कार्यक्रम में कही। 

उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है जहां पर धरती के प्रति भक्ति भाव पैदा हुआ और गंगा को मां का दर्जा मिला। जबकि अन्य देशों में नदियों को सिर्फ भौतिक वस्तु समझा जाता है। वहीं भारत में ऐसा भाव पैदा हुआ कि हजारों साल से लगातार चला आ रहा है। इसी के चलते तमिलनाडु से लेकर केरल तक के लोग कांवड़ यात्रा में गंगोत्री से जल लेकर सात सौ किलोमीटर पैदल चलते हैं। 

लोगों के भाव में कमी नहीं आयी, पर अंग्रेजों ने जिस तरह से गंगा को उपभोग की वस्तु समझा उससे गंगा की निर्मलता में जरुर कमी आयी। इसको लेकर हमें सजग होना है और अंग्रेजों द्वारा सीवर लाइनों को गंगा में जोड़ने का जो कार्य किया गया है उसे हटाना होगा। इसके लिए केन्द्र सरकार लगातार काम कर रही है। इसके साथ ही संघ का आनुषांगिक संगठन गंगा समग्र बराबर काम कर रहा है और लोग गंगा की पौराणिकता को वापस लाने के लिए तेजी से जुड़ रहे हैं। 

गंगा समग्र ने गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक गंगा को अविरल बनाने के लिए 80 टीमों का गठन किया है। यह टीम गंगा के दोनों ओर पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के लोगों में गंगा की निर्मलता के प्रति भाव पैदा करेगी। इसके साथ ही जलधारा निरंतर चलती रहे उसके लिए पौधरोपण और तालाबों के संरक्षण पर कार्य कर रही है। 

इस दौरान गंगा समग्र के राष्ट्रीय सचिव मिथलेश जी, बृजेन्द्र पाल सिंह, क्षेत्र प्रमुख गंगा समग्र बिहार रमाशंकर सिन्हा, उत्तर पूर्व क्षेत्र प्रांत संयोजक झारखण्ड डा. देवव्रत, प्रांत सह संयोजक दक्षिण बंगाल बृज उपाध्याय, प्रांत सह संयोजक उत्तर बंगाल अजीत दास, प्रांतीय सह संयोजक काशी प्रांत राकेश, भवानी भीख, डा. अंगद सिंह, बॉबी पाठक, सीएमओ डा. अनिल कुमार मिश्र, प्राचार्य बीएनडी डा. विवेक द्विवेदी, रघुनंदन सिंह भदौरिया, पूनम द्विवेदी आदि मौजूद रहें। बताते चलें कि गंगा समग्र की दो दिवसीय बैठक व पुस्तक विमोचन कार्यक्रम पूरी तरह से कोविड नियमों का पालन करते हुए संपन्न हुआ। 

देवताओं की तपस्या का रस है गंगा
गंगा समग्र के राष्ट्रीय सचिव आशीष जी ने कहा कि हिमालय में देवताओं का स्थान है और वहीं पर उन्होंने तप किया। उनके तप से निकला रस अलग-अलग जगहों से टप-टप गिर रहा है जो गंगा के रुप में हमारे सामने हैं। मोक्षदायिनी गंगा के प्रति लोगों में ऐसी भक्ति भाव है कि गरीब से लेकर अमीर तक एक साथ गंगा स्नान करते हैं। 

गंगा समग्र पुस्तिका का हुआ विमोचन
गंगा समग्र को लेकर बेनाझाबर स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन कालेज में दो दिवसीय मां गंगा पर चिंतन व मंथन हुआ। यहां पर बुधवार को देर शाम गंगा समग्र पर आधारित पत्रिका का विमोचन मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल जी, उत्तराखण्ड से आये गंगा समग्र के राष्ट्रीय सचिव आशीष जी, अध्यक्ष एचबीटीयू के कुलपति प्रो. एनबी सिंह व प्रांत संयोजक गंगा समग्र राघवेन्द्र जी ने किया। सर्वप्रथम कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर किया गया। 

पांच राज्यों से आये पदाधिकारी
गंगा समग्र की दो दिवसीय बैठक में गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक आने वाले पांच राज्यों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान यहां पर उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और पश्चिमी बंगाल से बनी 80 इकाइयों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने गंगा की निर्मलता व अविरलता को लेकर आगामी रणनीति तैयार की।

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