संजीवनी टुडे

नमो सरकार में दोबारा दो मंत्रियों से गुलजार हुआ शाहाबाद, जनपद में खुशी की लहर

संजीवनी टुडे 31-05-2019 13:54:23


आरा। सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी की सत्ता में दोबारा वापसी के साथ शाहाबाद में जश्न का माहौल है। शाहाबाद से दो-दो सांसदों को दोबारा केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस निर्णय से शाहाबाद में खुशी की लहर दौड़ गई है।शपथ ग्रहण समारोह के बाद से जश्न का माहौल है और लोग एक दूसरे से मिल खुशी का इजहार करने में लगे हैं। शाहाबाद के चार में से दो संसदीय क्षेत्रों से चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंचने पर मोदी मंत्रिमंडल में भोजपुरिया परचम लहरा गया है। आरा से आर के सिंह उर्फ राज कुमार सिंह और बक्सर से अश्वनी चौबे दोबारा जीते भी हैं और दोबारा मंत्री भी बन गए हैं। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर बांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की धरती और प्राचीन काल में पांडवों की भूमि आरण्य की आरण्य देवी स्थल के साथ ही द्वापर युग मे सहस्त्राबहु और भगवान शिव के परम भक्त वाणासुर की नगरी आरा जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक इलाके से जीत का परचम लहरा कर संसद पहुंचने वाले आर के सिंह को फिर मंत्री के रूप में अहम जिम्मेवारी दी गई है। 

आर के सिंह का कोई राजनैतिक इतिहास तो नहीं था और न ही उनके पास संघ, एबीवीपी जैसे संगठनों में कार्य का तजुर्बा। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा में थे। भारत के गृह सचिव रहते उन्होंने देश की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वाले आतंकवादी अफजल कसाब को फांसी की सजा तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अफजल कसाब को फांसी के फंदे पर लटकाने के बाद एकाएक आर के सिंह सुर्खियों में आ गए थे और देश के गृह सचिव के रूप में पूरी दुनिया में वाहवाही बटोरी थी। यही नहीं, भाजपा के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी को उनकी रथयात्रा के दौरान बिहार में गिरफ्तार करने के बाद भी आर के सिंह चर्चा में आ गए थे। ब्यूरोक्रेसी से बाहर आने के बाद भाजपा ने उन्हें 2014 में आरा से टिकट दे दिया और खुद नरेंद्र मोदी ने आर के सिंह का चुनाव प्रचार किया था। उस समय नरेंद्र मोदी की सभा में लाखो की भीड़ आरा एयरपोर्ट के मैदान में उमड़ पड़ी थी और आर के सिंह चुनाव जीत गए थे। बाद में उन्हें भारत सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया और विद्युत, नवीन और नवीकरणीय उर्जा राज्यमंत्री जैसा विभाग दिया गया। देश के सुदूरवर्ती इलाकों तक बिजली पहुंचाने की अहम जिम्मेवारी उन्हें दी गई थी और आर के सिंह ने देश के कोने-कोने तक बिजली पहुंचाकर इस मुश्किल लक्ष्य को पूरा किया।

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उन्होंने मंत्री पद के रूप में दी गई जिम्मेवारियों को निभाने के साथ अपने संसदीय क्षेत्र आरा का भी कायाकल्प कर दिया। विकास की बड़ी-बड़ी योजनाएं धरातल पर उतार दी और जनहित के कई कार्य किए। उधर, महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि बक्सर की धार्मिक भूमि और चौसा युद्ध का गवाह रहे बक्सर की ऐतिहासिक धरती से दुबारा चुनाव जीत कर दोबारा मंत्री बनने वाले अश्वनी चौबे को लेकर भी इलाके के समर्थक व प्रशंसक जश्न मना रहे हैं। अश्वनी चौबे के राज्यमंत्री बनाए जाने पर बक्सर में लोगों में खुशी का माहौल है। आरा की बात करें तो आर के सिंह को काम के बदौलत दोबारा मंत्री बनाया गया है। बिहार में राजीव प्रताप रुढ़ी और राधामोहन सिंह जैसे राजपूत नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर रखते हुए राज्य से आर के सिंह जैसे राजपूत चेहरे को मंत्रिमंडल में जगह देकर इस शून्यता को भरने की कोशिश की गई है। बिहार से राजपूत जाति से एकमात्र मंत्री के रूप में आर के सिंह को जगह देकर अब इस समाज का प्रतिनिधित्व करने की अहम जिम्मेवारी भी उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार ने दे दी है। राधामोहन सिंह और राजीव प्रताप सिंह रुढ़ी नरेंद्र मोदी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके थे। इनमें से राजीव प्रताप सिंह रुढ़ी को बीच  में ही नरेंद्र मोदी ने ड्रॉप कर दिया था।

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आर के सिंह को दोबारा मंत्री बनाये जाने पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री व भाजपा नेता राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि आर के सिंह एक सांसद और एक केंद्रीय मंत्री के रूप में फिर से इतिहास रचेंगे।आरा के पूर्व विधायक और बिहार विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आर के सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने पर उन्हें बधाई दी है। भाजयुमो के जिला प्रवक्ता संजीव सिंह ने आर के सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि आर के सिंह के विकास पर पहले जनता ने मुहर लगाई और अब देश के प्रधानमंत्री ने इसपर मुहर लगाते हुए उनमें दोबारा अपना विश्वास जताया है। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में शाहाबाद से केंद्र सरकार में तीन मंत्री थे किंतु रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा के महागठबन्धन में चले जाने से काराकाट सीट इसबार जदयू के खाते में चली गई। यहां से जदयू उम्मीदवार की जीत हुई। उपेन्द्र कुशवाहा के एनडीए छोड़ने के साथ ही उसका राजनैतिक पतन हो गया है और बिहार की दो-दो सीटों से चुनाव लड़ने के बावजूद जनता ने उन्हें नकार दिया। अगर उपेन्द्र कुशवाहा एनडीए में बने रहते तो शाहाबाद को केंद्र सरकार में दो की जगह फिर से तीन-तीन मंत्री मिल गए होते।

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