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बाबरी मस्जिद के दरवाजे खोलते ही श्रीराम की मूर्ति आई नजर, जानिए पूरा मामला

संजीवनी टुडे 21-02-2018 16:53:52

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डेस्क। देश को आजाद हुए एक साल गुजर चुका था। राममंदिर को लेकर यह आशंका जताई जा रही थी कि अब हमारी सरकार आ गई है तो मामला सुलझा लिया जाएगा। पं. जवाहर लाल नेहरू और सरदार वल्लभ भाई पटेल देश को संभालने में लगे थे तो वहीं भीमराव अंबेडकर देश के लिए सविंधान बनाने में दिन रात एक किए हुए थे।

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देश की आजादी का सब अपने अपने ढंग से जश्न मना रहे थे। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर एक समूह बहुत सक्रिय लग रहा था। राम मंदिर के आशिंक आंदोलन के दौरान एक दिन जो हुआ उससे यह आंदोलन बहुत उग्र हो गया और पूरे देश में इसका असर दिखने लगा।

बात साल 1949 की है, दिसबंर महिने की कड़कड़ती सर्दी में धर्म की नगरी अयोध्या का महौल गर्म हो गया। 23 तारीख की सुबह जैसे ही मस्जिद का दरवाजा खोला गया तो देखकर सब हैरान रह गए। दरवाजा खुलते ही लोगों के सामने मस्जिद में भगवान राम की प्रतिमा मिली। हिंदूओं का दावा था कि भगवान श्रीराम प्रकट हुए है जबकि मुस्लिम समुदाय का कहना था कि यह साजिश के तहत किया गया है। 

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यह विवाद इतना बढ़ा कि अयोध्या नगरी में दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। इसी को देखते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने 5 जनवरी 1950 को बाबरी मस्जिद को विवादित स्थल घोषित कर दिया। भवन को ताला लगाकर सरकारी कब्जे में ले लिया।

हालांकि आज भी इस मूर्ति प्रकट को लेकर अयोध्या की गलियों में कई किदवंतियां हैं। हिंदू समुदाय का मानना है कि उस दिन सचमुच भगवान राम प्रकट हुए वहीं मुस्लिम समुदाय का मानना है कि कुछ उग्र लोग मस्जिद में जबरन घुसकर श्रीराम की मूर्ति रख दी।

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लेकिन इससे जुड़ी सच्चाई का अंदाजा उसी दिन दर्ज हुई एफआईआर से लगाया जा सकता है। जिसमें अयोध्या के पुलिस स्टेशन के ऑफिसर इंचार्ज ने मुख्य रूप से तीन लोगों को नामजद किया था। अभिराम दास, राम शकल दास और सुदर्शन दास. इसके अलावा 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी दंगा भड़काने, अतिक्रमण करने और एक धर्मस्थल को अपवित्र करने का मामला दर्ज किया गया था।

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