संजीवनी टुडे

राष्ट्रीयता की पहचान थे शाहजहां के पुत्र दारा शिकोह: नकवी

संजीवनी टुडे 12-09-2019 08:28:21

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दारा शिकोह कुछ इतिहासकारों की सुनियोजित साजिश के शिकार हुए हैं।


दिल्ली। केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को कहा कि हिन्दुत्व और इस्लाम के सह अस्तित्व पर शांति के संदेश के वाहक एवं सर्व धर्म समभाव के उपासक मुगल सम्राट शाहजहां के पुत्र दारा शिकोह जीते जी अपने भाई औरंगजेब की क्रूरता की बली चढ़े और मरणोपरांत तथाकथित धर्मनिरपेक्ष इतिहासकारों के असहिष्णुता के शिकार बने।

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नकवी ने भारत की समन्वयवादी परम्परा के नायक ‘दारा शिकोह’ पर एकेडमिक्स फॉर नेशन द्वारा आज यहां कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित संगोष्ठी में यह बात कही। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दारा शिकोह कुछ इतिहासकारों की सुनियोजित साजिश के शिकार हुए हैं जिन्होंने उनके संदेश तथा उनकी हिन्दुस्तानी संस्कृति और परंपरा की विचारधारा को इतिहास के पन्नों से गायब कर दिया है। ऐसा करके इन इतिहासकारों ने बहुत बड़ा अपराध किया है।

उन्होंने कहा कि राज गद्दी के लिए अपने भाई दारा शिकोह का सर कलम करके जेल में बंद अपने पिता शाहजहां के पास भेजने वाला औरंगजेब आतंकवाद का प्रतीक था और दारा शिकोह राष्ट्रीयता के परिचायक थे।

उन्होंने कहा,“ दारा शिकोह ने 52 उपनिषदों का संस्कृत से फारसी में अनुवाद किया था। इससे उनकी सनातन संस्कृति और परंपरा के प्रति कटिबद्धता प्रतिबिंबित होती है, लेकिन उनकी इन्हीं खूबियों से बौखलाए औरंगजेब ने उन्हें काफिर करार देते हुए उनका सिर कलम करवा दिया।”

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उन्होंने कहा,“ कुछ वामपंथी, सेक्युलर इतिहासकारों की जमात ने अराजक एवं हिंसक औरंगजेब जैसे शासक का महिमामंडन करने का काम किया। औरंगजेब की सोच इंसानी मूल्यों, हिंदुस्तान की सनातन संस्कृति को तबाह करने की साजिशों से भरी थी। ऐसी ही सोच ने अलकायदा, आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे शैतानी संगठनों को जन्म दिया। अगर हमने दारा शिकोह की संस्कृति-संस्कार और सन्देश को अपनी पीढ़ी की रगों में उतारा होता तो ऐसी शैतानी ताकतें, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं, वे ही पनप नहीं पातीं। दारा शिकोह के शांति का संदेश हिंदुत्व और इस्लाम के सह अस्तित्व पर आधारित था।

इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल और बड़ी संख्या में जाने-माने शिक्षाविद, विचारक, प्रमुख बुद्धिजीवी एवं समाज सेवी उपस्थित थे।

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