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Coronavirus को लेकर सरकार ने दी बड़ी चेतावनी, कहा- कोविड19 के इलाज के लिए भूलकर भी न करे इस एक चीज का इस्तेमाल

संजीवनी टुडे 26-03-2020 08:04:43

कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा देश में लगातार बढ़ता ही जा रहा है।


डेस्क। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा देश में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। दुनियाभर की सरकारें इस घातक बीमारी से जल्द से जल्द निजात पाने की सोच रही है। लेकिन अभी तक किसी तरह का कोई इलाज सामने नहीं आया है। ऐसे में सरकार ने आम लोगों को मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल कोरोना वायरस के इलाज में न करने की चेतावनी दी है। 

हाल ही में एक रिपोर्ट में मलेरिया की दवा हाइड्रोक्लोरोक्वीन को कोविड 19 के इलाज में कारगर बताया गया था, जिसके बाद से इस दवाई की ब्रिकी काफी बढ़ गई थी। तेजी से बढ़ती बीमारी SARS-CoV2 (कोविड19) पर इस दवा को काफी असरदार माना जा रहा था, लेकिन जल्दबाजी में इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए भारत ने इसके निर्यात पर भी बैन लगा दिया है। इसके पीछे तर्क यह है कि बिना नियंत्रित क्लिनिकली ट्रायल के अभी इस दवा को लेकर किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा का सकता।  

hydrochloroquine

इंडियन कांउसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, एपिडेमियोलॉजी विभाग के चीफ रमन आर गंगाखेड़कर ने जानकारी देते हुए इस दवा के प्रयोग पर कहा- “हम हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा प्रयोग के तौर पर कुछ लोगों को दे रहे हैं। शोध के बाद हमने कई वर्गों से ऐसे लोगों को दवा देने के लिए चुना है। इस लोगों की संख्या बहुत कम है, इसलिए इन्हें आसानी से मॉनिटर किया जा सकता है। यह कुछ लोगों के लिए है, सभी के लिए नहीं। “

उन्होंने आगे कहा कि रोग उपचार के लिए दवा को इस्तेमाल करने के लिए इंफेक्शन और फ्लू और इसके जैसे लक्षणों के आधार पर दो भागों में बांटा गया है। एक वर्ग में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखते। इसमें हेल्थकेयर क्षेत्र से जुड़े हुए लोग जो कोविड19 के संदिग्ध मरीज या कम्फर्म केस हैं। इस दवा को 15 साल से कम उम्र या 60 साल से ज्यादा आयु वाले लोगों को नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसके साइड इफेक्ट्स भी हैं। 

बीते मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश जारी करते हुए हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा के साथ रोग निरोधी दवाओं के गलत इस्तेमाल पर रोक लगा दी। 

इस बारे में  दिल्ली के ड्र्ग्स कंट्रोल ऑफिसर अतुल नासा का कहना है “जब से हेल्थ वकर्स और कोविड-19 के संपर्क में आने वाले मरीजों को हाइड्रोक्लोरोक्वीन देने की खबर आई थी, तब से लोग इस दवा को खरीदने के लिए केमिस्ट शॉप पर जाने लगे थे। जबकि इस दवा की जरुरत सभी को नहीं है।"

ऐसे में प्रतिक्रिया वश एडवायजरी जारी की गई कि सभी केमिस्ट बिना किसी डॉक्टरी पर्चे के इस दवाई को न बेचें। ऐसे में अब यह दवा बिना डॉक्टरी सलाह के किसी को नहीं मिल सकती। वहीं, देश में हैंड सेनेटाइजर और वेंटिलेटर की कमी के चलते भारत ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए निर्यात नीति में संशोधन करते हुए वेंटिलेटर, कृत्रिम श्वसन उपकरणों पर तत्काल प्रभाव से निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है। 

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अगर चीन, यूरोप या अफ्रीका में रहने वाले किसी 80 वर्षीय वृद्ध को कोरोना वायरस से होने वाले जोखिम का अंदाजा लगाया जाए तो चीन में रहने वाले 80 वर्षीय वृद्ध नागरिकों को कोरोना वायरस से ज्यादा खतरा हो सकता है। आपकी मेडिकल हालत कैसी होगी, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपको किस तरह का ट्रीटमेंट मिला है। इसके साथ ही एक बात ये भी अहम है कि कोई व्यक्ति ये बीमारी फैलने के किस स्तर पर संक्रमित हुआ है।

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