संजीवनी टुडे

चुनावी बांड पर निर्वाचन आयोग का यू टर्न

संजीवनी टुडे 10-04-2019 18:44:18


नई दिल्ली। राजनीतिक दलों के चंदे के लिए चुनावी बांड की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को निर्वाचन आयोग ने अपने पहले के रुख से यू-टर्न ले लिया है। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने कहा कि वो पार्टियों की फंडिंग के लिए चुनावी बांड के खिलाफ नहीं है बल्कि वो धन देने वालों के नाम गुप्त रखने के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को इस बात की याद दिलाई कि उसने केंद्र को लिखे पत्र में चुनावी बांड को एक अच्छा कदम नहीं माना था। कोर्ट ने पूछा कि क्या आपका रुख बदल गया है। तब निर्वाचन आयोग ने कहा कि चुनावी बांड में कुछ भी गलत नहीं है लेकिन चुनावी बांड में फंड करने वालों के नाम सार्वजनिक होने चाहिए क्योंकि निर्वाचन आयोग और लोगों को राजनीतिक दलों की फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है।

याचिका में इससे भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है। वकील प्रशांत भूषण ने इस पर तुरंत रोक लगाने की भी मांग की है। पिछले पांच अप्रैल को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप मांग के समर्थन में तथ्य दें, हम उस पर विचार करेंगे। निर्वाचन आयोग ने पहले हलफनामा दायर कर चुनावी बांड का विरोध किया था जबकि केंद्र सरकार ने इसका समर्थन किया।

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पिछले दो फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने भी दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने येचुरी की याचिका को एक एनजीओ द्वारा दायर ऐसी ही याचिका के साथ टैग कर दिया था।याचिका में फाइनेंस एक्ट-2017 के तहत चुनावी बांड के जरिए राजनीतिक दलों को फंडिंग करने के प्रावधान को चुनौती दी गई है। एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स(एडीआर) ने भी याचिका दायर कर इस कानून का विरोध किया है। एडीआर की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि इस संशोधन के तहत किसी कारपोरेट द्वारा राजनीतिक दलों को धन देने की अधिकतम 7.5 फीसदी सीमा को खत्म कर दिया गया है।

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इस चुनावी बांड के जरिए राजनीतिक दल बिना किसी खुलासे के धन ले सकते हैं। इस बांड को खरीदने वाले के नाम का खुलासा नहीं होगा और वो किसी भी राजनीतिक दल को ये बांड चंदे के रूप में दिया जा सकता है। इस बांड के जरिए राजनीतिक दल विदेशी संगठनों से भी चंदा ले सकते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले मार्च में लोकसभा ने फाइनेंस बिल 2017 में संशोधन किया था।

 

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