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तमिलनाडु की राजनीति पर आया संकट, फैसले से पहले पलानीस्वामी ने बुलाई बैठक

संजीवनी टुडे 14-06-2018 13:58:02


नई दिल्ली। तमिलनाडु की सियासत के लिए आज महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि अन्नाद्रमुक के 18 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय गुरुवार को फैसला सुना सकता है। इन सभी विधायकों को अन्नाद्रमुक के बागी नेता टीटीवी दिनाकरण के साथ वफादारी निभाने पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था। 

चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एम सुंदर की बेंच पहले से रिजर्व किए गए फैसले को दोपहर करीब 1 बजे सुनाएगी। फैसले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। अगर विधायक यह केस हारते हैं तो सरकार को कोई खतरा नहीं होगा। अगर विधायक केस जीत जाते हैं और सरकार के खिलाफ वोट देते हैं तो सरकार गिर जाएगी। 234 सदस्यों के सदन में अगर सभी सदस्य वोट करें तो सरकार को बहुमत के लिए 117 वोटों की जरूरत होगी। मौजूदा 113 की संख्या से यह बस चार वोट अधिक है।

लंबे समय से बीमार चल रहे डीएमके अध्यक्ष एम. करुणानिधि सदन की कार्यवाही में शामिल होने तो नहीं पहुंच सके हैं। लेकिन पार्टी प्रवक्ता के मुताबिक वह वोट करने जरूर पहुंचेंगे। इस बारे में बागी नेता थंग तमिल सेल्वन ने बताया कि वह अम्मा की सरकार को गिराना नहीं चाहते, अपना हक चाहते हैं। कई बागी नेता मुख्यमंत्री ई. पलानीसामी से समझौता करने के लिए भी तैयार हैं। 


बागियों में भी बगावत 

विधायकों की सदस्यता रद्द किए जाने से बागी कैंप में काफी असर देखने को मिला है। टीटीवी दिनकरण के रवैये को 18 विधायकों में से कई सत्तावादी मानते हैं। मन्नारगुडी परिवार से आने वाले बागी नेता धीवकरण पहले ही दिनकरण के खिलाफ बगावत कर चुके हैं। 


सरकार में जताया था अविश्वास 

बता दें कि 18 सितंबर 2017 को तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर पी. धनपाल ने 18 एआईएडीएमके विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी थी। विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर पलानीसामी सरकार में अविश्वास जाहिर किया था।

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सदस्यता रद्द होने के बाद विधायक हाई कोर्ट चले गए थे। 20 सितंबर 2017 को हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को इन विधायकों की सीटें खाली घोषित करने से रोक दिया था। 

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