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देश के प्रख्यात भूगर्भ शास्त्री पद्मभूषण प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का निधन, जानें प्रमुख उपलब्धियां

संजीवनी टुडे 29-09-2020 22:37:49

उनके निधन के समाचार से कुमाऊं विश्वविद्यालय, प्रो. वल्दिया द्वारा यहां स्थापित भूविज्ञान विभाग में शोक की लहर छा गई है।


नैनीताल। देश के प्रख्यात भूगर्भ शास्त्री पर्यावरणविद् पद्मविभूषण व पद्मश्री तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का मंगलवार को 85 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया। 

उनके निधन के समाचार से कुमाऊं विश्वविद्यालय, प्रो. वल्दिया द्वारा यहां स्थापित भूविज्ञान विभाग में शोक की लहर छा गई है। उनके निधन पर कूटा यानी कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की ओर से अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, महासचिव डा. सुचेतन साह, डा. विनय कुमार, डा. दीपक कुमार, डा. दीपिका गोस्वामी के साथ ही प्रो. राजीव उपाध्याय, डा. बीएस कोटलिया, डा. आशीष तिवारी व विधान चौधरी आदि ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। उल्लेखनीय है कि प्रो. वल्दिया मूलतः पिथौरागढ़ जनपद के निवासी थे और वर्तमान में बेंगलुरू में ही रहते थे, जहां उनका निधन हो गया। हालांकि उनका नैनीताल नगर में भी लांग व्यू क्षेत्र में आवास है, जहां वह अक्सर गर्मियों में आते रहते थे।

पद्म भूषण खड्ग सिंह वल्दिया का जीवन परिचय
माताः श्रीमती नन्दा वल्दिया, पिताः स्व. देव सिंह वल्दिया, जन्मतिथि: 20 मार्च 1937, जन्म स्थान: कलौ (म्यामार), पैतृक गांव: घंटाकरण जिला-पिथौरागढ़, पारिवारिक स्थिति- एक विवाहित पुत्र, शिक्षा: एमएससी., पीएचडी

प्रमुख उपलब्धियां
1965-66 में अमेरिका के जान हापकिन्स विश्वविद्यालय के ‘पोस्ट डाक्टरल’ अध्ययन और फुलब्राइट फैलो। 1969 तक लखनऊ विवि में प्रवक्ता। 
राजस्थान विवि, जयपुर में रीडर। 
1973-76 तक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियॉलॉजी में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी। 
1976 से 1995 तक कुमाऊं विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे। 
1981 में कुमाऊं विवि के कुलपति तथा 1984 और 1992 में कार्यवाहक कुलपति रहे। 
1995 से जवाहरलाल नेहरू सेन्टर फार एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च केन्द्र बेंगलुरू में प्रोफेसर। 
मध्य हिमालय की भूवैज्ञानिक संरचना से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण अध्ययनों के अध्येता। 
उल्लेखनीय कार्य के लिए 1976 में ‘शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार’ से सम्मानित।
जियॉलाजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा ‘रामाराव गोल्ड मैडल’। 
1977-78 में यूजीसी द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्मान। 
राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा ‘एसके मित्रा एवार्ड’ और डीएन वाडिया मैडल। 
1997 में भारत सरकार द्वारा ‘नेशनल मिनरल अवार्ड एक्सीलेंस’। 
दो दर्जन से अधिक विशेषज्ञों की राष्ट्रीय समितियों, परिषदों, कमेटियों के सदस्य रहे। 
1983 में प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य और योजना आयोग की अनेक उप समितियों के सदस्य रहे। 
2 फरवरी से 2003 इन्सा के राष्ट्रीय प्रोफेसर।

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