संजीवनी टुडे

कांग्रेस का किला ढहाने के लिए दो साल से चल रही थी रणनीति

संजीवनी टुडे 25-05-2019 22:22:04


रोहतक। जाट लैंड का गढ़ माने जाने वाली रोहतक सीट पर जीत हासिल करने के लिए दो साल पहले ही भाजपा ने रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। इसको लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व केन्द्रीय पदाधिकारियों ने जो रणनीति तय की थी, वह पूरी तरह सही साबित हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तीन दिन के लिए रोहतक में ही प्रवास रखा और साफ साफ संकेत दिए कि हर हाल में रोहतक सीट जीतनी है। इसको लेकर रोहतक लोकसभा सीट के प्रभारी तक की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई। यहीं नहीं स्वयं मुख्यमंत्री व संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने रोहतक सीट पर फोकस रखा, जबकि कांग्रेस ने इस सीट को बचाने के लिए तमाम प्रयास किए, लेकिन मोदी की लहर व कांग्रेस के संगठन नहीं होने के चलते भाजपा जीत दर्ज कराने में कामयाब हो पाई, जबकि इस सीट पर प्रत्याशी को लेकर अंतिम समय तक मंथन चलता रहा और आखिर में भाजपा ने गैरजाट कार्ड खेला। डॉ. अरविंद शर्मा की टिकट को लेकर प्रदेश के नेताओं में नाराजगी जरूर थी, लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व का साफ संदेश था कि दस सीटों में से रोहतक सीट अतिमहत्वपूर्ण है और इसको लेकर केन्द्रीय पदाधिकारियों ने रोहतक में ही डेरा डाल लिया। 14 साल से सांसद रहे दीपेन्द्र हुड्डा अपनी शराफत व काम को लेकर आश्वत थे कि इस बार जनता उन्हें फिर स्वीकार करेगी। रोहतक हॉट सीट पर शुरू से ही भाजपा की नजर थी। 

करीब दो साल पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के तीन दिवसीय रोहतक प्रवास के दौरान इस सीट पर भाजपा की निगाह बढ़ गई थी और कुछ माह बाद ही केन्द्रीय नेताओं की एक कमेटी को इस सीट की भी जिम्मेदारी सौंपी गई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही साफ कर दिया था कि रोहतक सीट उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है और इस सीट पर जीत के लिए मुख्यमंत्री ने भी जी तोड मेहनत की है। भाजपा को सबसे बड़ा फायदा बूथ प्रभारी, पन्ना प्रमुखों व संगठन का मिला, जबकि कांग्रेस को संगठन मजबूत नहीं होने का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। कांग्रेस की आपसी गुटबाजी होने के कारण पिछले पांच साल से ब्लाक स्तर व जिला स्तर पर कार्यकारिणी का कोई गठन नहीं हो पाया था और कांग्रेस के लिए यहीं सबसे बडी समस्या सामने आई। लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही भाजपा के नेताओं ने रोहतक में ही डेरा डाल लिया था, जबकि कांग्रेस की तरफ से सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा व कांग्रेस प्रत्याशी रहे पूर्व सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ही कमान संभाले हुए थे। चुनाव प्रचार के दौरान तो जहां प्रधानमंत्री की रैली हुई, वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रोड शो, हलके वाईज रैलियां कर कांग्रेस को पछाड़ने का काम किया है। 

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हुड्‌डा ने की कड़ी मेहनत 
हुड्डा की 114 दिन कड़ी मेहनत, तीन लाख से अधिक लोगों से रुबरु, साढ़े पांच सौ के करीब गांव, लेकिन भाजपा प्रत्याशी के 26 दिन रहे भारी कांग्रेस प्रत्याशी ने करीब साढ़े तीन महीने पहले ही शुरु कर दिया था प्रचार-प्रसार, भाजपा प्रत्याशी को मिले सिर्फ 26 दिन, आधे ही लोकसभा क्षेत्र में पहुंच पाएं रोहतक हॉट सीट को लेकर कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा व भाजपा प्रत्याशी डा. अरविंद शर्मा के बीच मुकाबला इतना कडा था कि न तो उन्होंने अपने स्वास्थ्य की चिंता की और ना ही दिन रात की। 24 घंटे बस एक ही मिशन रोहतक सीट फतेह करना। जहां चुनाव प्रचार के लिए भाजपा प्रत्याशी को 26 दिन मिले और वह आधी ही लोकसभा क्षेत्र तय कर पाए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी दीपेन्द्र हुड्डा ने 114 दिन के दौरान साढे़ पांच सौ के करीब गांव कवर किए और तीन लाख से अधिक लोगों से मिले, लेकिन भाजपा प्रत्याशी के 26 दिन उन पर भारी पड़ गए। प्रचार प्रसार के दौरान जहां दीपेन्द्र हुड्डा चार बार बीमार हुए तो डॉ. अरविंद शर्मा के गले में खराबी हुई, लेकिन दोनो ने चुनाव प्रचार के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी थी। भाजपा प्रत्याशी डॉ. अरविंद शर्मा को मात्र 26 दिन ही मिल पाए थे। टिकट की घोषणा होने के दो दिन बाद पर्चा दाखिल और उसके बाद उन्होंने प्रचार प्रसार शुरू किया, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी साढे़ तीन महीने पहले ही प्रचार प्रसार में जुट गए थे। 

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