संजीवनी टुडे

छात्र जीवन से लेकर संसदीय राजनीति तक शानदार रहा तरुण गोगोई का सफ़र

संजीवनी टुडे 23-11-2020 21:20:11

असम की राजनीति के कद्दावर नेताओं में शुमार पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई अपने छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों से जुड़ गए थे।


गुवाहाटी। असम की राजनीति के कद्दावर नेताओं में शुमार पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई अपने छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों से जुड़ गए थे। इसके बाद वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में शामिल होते हुए अपने संसदीय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। तरूण गोगोई कुल 06 बार लोकसभा के सांसद निर्वाचित हुए।

जोरहाट लोकसभा संसदीय क्षेत्र से 1971 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होकर संसद में पहुंचे थे। इससे पहले वे जोरहाट पौरसभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे। जोरहाट संसदीय सीट से तरुण गोगोई 1971, 1977 और 1983 में सांसद निर्वाचित हुए थे। इसके पश्चात 1991 में कलियाबर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से वे निर्वाचित हुए और पीवी नरसिम्हा राव सरकार में केंद्रीय खाद्य विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), उसके बाद केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण विभाग के मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पदभार संभाला। इन सबके बीच 1996 में 2 वर्षों के कार्यकाल के लिए असम के मार्घेरिटा विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के लिए भी निर्वाचित हुए थे। उसके पश्चात 2001 से तरूण गोगोई मृत्यु पर्यंत तक जोरहाट जिला के तिताबर विधानसभा क्षेत्र से लगातार जीत हासिल करते रहे।

विधानसभा के लिए वे 2001 में निर्वाचित हुए तथा असम गण परिषद के नेतृत्व वाली प्रफुल्ल कुमार महंत की सरकार को सत्ता से हटाकर तरुण गोगोई ने अपने नेतृत्व में राज्य में कांग्रेस की सरकार का गठन किया। अगप के शासनकाल में राज्य की आर्थिक स्थिति बेहद डावांडोल हो चुकी थी जिसे तरुण गोगोई ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से पटरी पर लाने की एक अच्छी पहल की। इसका परिणाम 2006 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला और फिर से उनके नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार का गठन हुआ। इस दौरान राज्य में उग्रवाद अपने चरम पर था जिससे तरुण गोगोई ने बखूबी मुकाबला करते हुए राज्य में शांति व्यवस्था कायम करने की भरपूर कोशिश की। इसके चलते 2011 के विधानसभा चुनाव में पुनः राज्य में कांग्रेस बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई।  कांग्रेस ने 2011 में बोड़ो पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार का गठन किया। हालांकि, तरुण गोगोई निर्विवाद रूप से राज्य में पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने लगातार तीन बार मुख्यमंत्री के पदभार संभाला। 

जोरहाट के बाद कलियाबर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से वे तीन बार सांसद चुने गये। विधानसभा में निर्वाचित होने के बाद अपनी परंपरागत कलियाबर सीट से अपने भाई दीप गोगोई को चुनाव मैदान में उतारा और वे वहां से जीत हासिल की। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने पुत्र गौरव गोगोई को उन्होंने कलियाबर लोकसभा सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार के तौर पर उतारा जहां से गौरव ने जीत हासिल की।

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की बड़ी पराजय के बाद देश में भाजपा का जनाधार तेजी से बढ़ा। राज्य में लगातार तीन बार कांग्रेस की सत्ता के चलते सरकार के विरुद्ध विरोधी लहर उत्पन्न हो चुकी थी। सरकार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार भी हुआ। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई और भाजपा अपने बलबूते सरकार बनाने में सफल रही। 

पार्टी में महत्वपूर्ण दायित्व
कांग्रेस पार्टी के विश्वसनीय नेता तरुण गोगोई 1976 में पहली बार अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव का दायित्व संभाला। इसके पश्चात 1983 में कांग्रेस में टूट के बाद इंदिरा कांग्रेस में अखिल भारतीय कांग्रेश इंदिरा के संयुक्त सचिव का दायित्व और 1985 में महासचिव का पदभार ग्रहण किया। 1986 से 1990 तक कांग्रेस (आई) के असम प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। 1996 में दूसरी बार वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। 2001 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता वापसी कराई और पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री का पदभार दिया।

अन्य जिम्मेदारियां
पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई केंद्रीय सरकार की कई कमेटियों में सदस्य के रूप में भी कार्यों का निर्वहन किया। वे केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय की कमेटी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सलाहकार समिति, रेलवे आदि की कमेटियों में सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक सूझबूज का परिचय दिया। उनके निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है।

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