संजीवनी टुडे

राजीव कुमार पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार

संजीवनी टुडे 21-05-2019 22:23:07


कोलकाता। अरबों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाला मामले में साक्ष्यों को मिटाने के आरोपित कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त राजीव कुमार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के इन्कार और राज्य के कोर्ट में वकीलों की हड़ताल के बीच इस बात की सम्भावना बलवती हो गई है कि राजीव कुमार की गिरफ्तारी लगभग तय है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उनके पास सिर्फ दो दिन का समय शेष है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया है कि उनकी जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा। 

इसके लिए उन्हें निचली अदालतों में ही जाना होगा। जमानत के लिए उन्हें सात दिन का अतिरिक्त समय देने से भी इनकार कर दिया है। इसके बाद एक बार फिर राजीव कुमार अपनी अग्रिम जमानत के लिए पश्चिम बंगाल की कोर्ट के भरोसे हैं। हालांकि, बंगाल में सभी कोर्टों के अधिवक्ताओं ने काम बंद कर रखा है, इसलिए एक बार फिर यह चर्चा बलवती हो गई है कि क्या राजीव कुमार की गिरफ्तारी तय है? दरअसल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राजीव कुमार को या तो कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत मिल सकती है या सीबीआई की बारासात विशेष कोर्ट से। इन दोनों अदालतों में कुमार पहले भी अपनी अग्रिम जमानत के लिए कोशिश कर चुके हैं।

गत शुक्रवार को जब पहली बार न्यायमूर्ति राजीव खन्ना और इंदिरा बनर्जी की खंडपीठ ने राजीव की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाई थी तब उसके दूसरे दिन उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट और बारासात की विशेष सीबीआई कोर्ट में अपनी जमानत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा लिया था, लेकिन अधिवक्ताओं ने उनकी जमानत याचिका लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद रविवार पड़ने से कोर्ट बंद हो गए। उस दिन अंतिम चरण का मतदान भी हुआ। थक हारकर सोमवार को राजीव कुमार सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचे थे जहां से मंगलवार को उन्हें बैरंग लौटा दिया गया है। अब उनके पास गुरुवार तक का समय बचा है। गुरुवार को कोर्ट के निर्देशानुसार एक सप्ताह का समय पूरा हो जाएगा। इसके बाद सीबीआई उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। 

बाकी बचे दो दिन यानि बुधवार और गुरुवार के बीच राजीव कुमार को किसी कोर्ट से जमानत मिल सकती है या नहीं इस बारे में 'हिन्दुस्थान समाचार' ने कलकत्ता हाई कोर्ट के अधिवक्ता प्रतीक तिवारी से बात की।उन्होंने कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए साफ किया कि राजीव कुमार को जमानत मिलना नामुमकिन है। 

इसकी वजह यह है कि राजधानी कोलकाता से सटे हावड़ा कोर्ट में अधिवक्ताओं पर पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज के खिलाफ राज्य भर में अधिवक्ताओं ने काम बंद रखा है। सोमवार को काम शुरू होने वाला था, लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं होने की वजह से अब 24 मई तक के लिए काम बंद कर दिया गया है। उसके बाद 25 मई से कोर्ट में गर्मी की छुट्टी हो जाएगी। इस बीच 24 मई को ही राजीव कुमार को अंतरिम जमानत के लिए मिली एक सप्ताह की समय सीमा समाप्त हो रही है। इसीलिए उनकी गिरफ्तारी तय है।पल्ला झाड़ चुकी है राज्य सरकार: इसी साल फरवरी महीने  की तीन तारीख को जब सीबीआई की टीम ने चिटफंड मामले में तत्कालीन पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के घर पहुंच कर पूछताछ की कोशिश की थी तब राजीव के इशारे पर कोलकाता पुलिस की टीम ने सीबीआई अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था। 

ममता बनर्जी उनके घर जा पहुंची थी और उनके (राजीव) खिलाफ राजनीतिक साजिश का आरोप लगाते हुए 70 घंटे तक धरने पर बैठी रही थी। तब ऐसा लगा था जैसे राजीव ममता के सबसे करीबी हैं और उन्हें बंगाल सरकार फंसने नहीं देगी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं के खिलाफ सीआईडी के एडीजी के तौर पर राजीव कुमार की एकतरफा कार्रवाई के बाद चुनाव आयोग ने उनका तबादला केंद्रीय गृह मंत्रालय में कर दिया है। 

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा दी है। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से राज्य के शिक्षा मंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार को राजीव कुमार के मामले से कोई लेना-देना नहीं है। कानून इसमें अपने मुताबिक काम करेगा। कुल मिलाकर कहा जाए तो बंगाल सरकार अब राजीव कुमार से पल्ला झाड़ चुकी है।

सीबीआई के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि पूर्व में राजीव कुमार से हुई पूछताछ के आधार पर उन्हें हिरासत में लेना जरूरी है। एक सप्ताह बाद इसकी कोशिश की जाएगी। अगर कुमार किसी तरह का कोई प्रतिकूल कदम उठाते हैं तो उनके खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 120 बी यानी चिटफंड मामले में षड्यंत्र रचने की धारा लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। यह गैर जमानती धारा है और इसमें गिरफ्तारी होना तय है।ऐसे में अगर वर्तमान हालात पर नजर डालें तो आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार चौतरफा घिर गए हैं। आने वाले दो दिन यानी बुधवार और गुरुवार उनके लिए या तो संकटमोचक होंगे या हथकड़ी लगने का रास्ता साफ करेंगे, यह देखने वाली बात होगी।

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उल्लेखनीय है कि राज्य भर के अधिवक्ताओं ने काम बंद कर रखा है। कोर्ट में जज तो बैठ रहे हैं, लेकिन केवल सरकारी अधिवक्ता काम कर रहे हैं। राजीव कुमार की जमानत याचिका सरकारी तौर पर नहीं लगाई जा सकती क्योंकि वह अब राज्य सरकार के अधिकारी नहीं हैं। चुनाव आयोग ने उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भेज दिया है।

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