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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- अब सभी निजी अल्पसंख्यक संस्थानों में नीट के जरिए ही होगा एडमिशन

संजीवनी टुडे 30-04-2020 07:48:48

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।


नई दिल्ली। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि देश में जारी सभी मेडिकल कोर्सों में दाखिला राष्‍ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के आधार पर ही होगा। यह आदेश निजी एवं गैर सहायता प्राप्‍त अल्पसंख्यक व्यावसायिक संस्‍थानों पर भी लागू होगा। यानी निजी एवं अल्पसंख्यक संगठनों द्वारा संचालित संस्‍थानों में भी एडमिशन के लिए अब नीट की परीक्षा पास करना जरूरी होगा। 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने कहा कि देश में निजी गैर-सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों में प्रवेश नीट (नेशनल इलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट) के जरिए ही दिए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कॉमन इंट्रेंस टेस्ट से अल्पसंख्यक संगठनों के अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं। फैसला देने वाली पीठ में जस्टिस अरुण मिश्रा, विनीत शरन और एमआर शाह शामिल थे। 

Supreme Court

दरअसल, निजी गैर-सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थानों ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि नीट के जरिए प्रवेश धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। इस मामले पर सुनवाई के बाद पीठ ने अपने फैसले में कहा, ‘‘अल्पसंख्यक संस्थानों के नीट के तहत आने से उनके अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं होता है। वर्तमान में शिक्षा, दान के अपने वास्तविक चरित्र से हट गई है। अब यह व्यापार की चीज बन गई है। एडमिशन में होने वाले भ्रष्टाचार और बुराइयों का सफाया करने के लिए नीट लाई गई थी। यह देश के हित में है। प्रवेश प्रक्रिया में अभी कई खामियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है।’’ 

बा दें कि इससे पहले, निजी और अल्पसंख्यक संस्थानों ने नीट के तहत प्रवेश प्रक्रिया को चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि यह निजी अल्पसंख्यक व्यावसायिक संस्थानों के अधिकारों को प्रभावित करता है। नीट प्राइवेट संस्थानों को व्यापार और व्यवसाय के संवैधानिक अधिकार में दखल देता है। अल्पसंख्यक संस्थानों को नीट से अलग दूसरी प्रवेश परीक्षा की अनुमति दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने दलील को खारिज करते हुए कहा- स्टूडेंट के हित में यही है कि जो मेरिट में आगे हो उसे लाया जाए। इससे जो बेहतरीन स्टूडेंट होंगे, उनको मान्यता मिलेगी।

Supreme Court

वहीं, निजी अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेजों का कहना है कि संविधान की धारा 30 में अल्पसंख्यकों को ये अधिकार दिए गए हैं कि वे अपनी शिक्षण संस्थान स्थापित कर सकते हैं और संविधान की धारा 30 के पैरा 50 में यह लिखा है कि अल्पसंख्यक संस्थान अपनी पसंद से छात्रों का प्रवेश लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

क्या होता है नीट?
मेडिकल से जुड़े कोर्स में प्रवेश के लिए नीट (नेशनल इलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट) अनिवार्य है। 2016 में इसको लाया गया था। इससे पहले केंद्र और राज्य मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के अलग-अलग एग्जाम कराते थे। इससे भ्रष्टाचार होता था। इसको देखते हुए केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ एक परीक्षा नीट लेकर आई थी।

Supreme Court

नीट के प्रावधानों को चुनौती देने का यह मामला काफी पुराना था। गैर सहायता प्राप्त निजी अल्पसंख्यक संस्थानों ने नीट से मेडिकल में प्रवेश देने को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि इससे संविधान में भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान चलाने और प्रबंधन के अधिकार का उल्लंघन होता है। कोर्ट ने दलीलें खारिज करते हुए कहा कि संस्थानों के प्रबंधन का अनुच्छेद 30 में मिला अधिकार कानून और संविधान के अन्य प्रावधानों से ऊपर नहीं है। इस पर तर्कसंगत मानक तय किये जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि एमसीआई एक्ट और डेन्टिस्ट एक्ट की धारा 10डी अनुच्छेद 30 में मिले अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती।

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