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हाथरस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा अहम फैसला

संजीवनी टुडे 27-10-2020 05:55:18

हाथरस मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा अहम फैसला


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट हाथरस मामले पर कल यानी 27 अक्टूबर को फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट करेगा या हाईकोर्ट। ट्रायल को दिल्ली ट्रांसफर किया जाए या नहीं और पीड़ित के परिवार और गवाहों की सुरक्षा यूपी पुलिस करेगी या सीआरपीएफ। कोर्ट ने पिछले 15 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कोर्ट ने परिवार की सुरक्षा और वकील की उपलब्धता पर विस्तार से जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल किया है। परिवार ने बताया कि उन्होंने सीमा कुशवाहा को वकील नियुक्त किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया करा दो गई है। घर में सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए गए हैं।

यूपी के डीजीपी की तरफ से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा था कि पीड़ित परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा की मांग की गई है। हम पीड़ित की सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था करने को भी तैयार हैं लेकिन कृपया इसे यूपी पुलिस पर नकारात्मक टिप्पणी की तरह न लिया जाए। चीफ जस्टिस ने कहा था कि हमने यूपी पुलिस पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की है।

यूपी सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा था कि पीड़ित परिवार को पर्याप्त सुरक्षा दी जा रही है। पीड़ित के गांव और घर के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। यूपी सरकार ने कहा था कि पीड़ित के परिवार के हर सदस्य को निजी सुरक्षकर्मी दिए गए हैं। घर के आसपास 8 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। यूपी सरकार ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट जांच की निगरानी करे। जांच की समय सीमा तय हो। कोर्ट सीबीआई से हर 15 दिन में रिपोर्ट ले।

याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सत्यमा दुबे, विकास ठाकरे रुद्र प्रताप यादव और सौरभ यादव ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यूपी में मामले की जांच और ट्रायल निष्पक्ष नहीं हो सकती है। याचिकाकर्ताओं की ओऱ से वकील संजीव मल्होत्रा ने कहा है कि पुलिस का यह बयान कि परिवार की इच्छा के मुताबिक शव का दाह-संस्कार किया गया है, झूठा है, क्योंकि पुलिसकर्मियों ने खुद ही मृत शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया। याचिका में कहा गया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के एक वर्तमान या रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में इस मामले का ट्रायल उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की गई है।

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