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सुप्रीम कोर्ट में फिर रार, एक मामले की सुनवाई के दौरान दो बेंचों में टकराव

संजीवनी टुडे 23-02-2018 13:00:28

Source: SanjeevniToday

नई दिल्ली। अभी कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाए थे। लेकिन अभी भी लग रहा कि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। हाल में एक मामले को सुप्रीम कोर्ट की दो बेंचें आमने सामने हो गई। जस्टिस एमबी लोकुर के नेतृत्व वाली तीन जजों की एक बेंच ने जस्टिस अरूण मिश्रा की तीन सदस्यीय बेंच के एक फैसले पर रोक लगा दी।

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मामला भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। हरियाणा सरकार बनाम जीडी गोयनका टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। जस्टीस एमबी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने 21 फरवरी को जस्टिस अरूण मिश्रा के वाली बेंच के फैसले पर रोक लगा दी। इसके बाद 22 फरवरी को जस्टिस अरूण मिश्रा ने इस मामले को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को रेफर कर दिया और पूछा कि हम इस मामले की सुनवाई करें या नहीं? उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को उचित बेंच को सौंप दिया जाए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाए थ्ो। जिसके बाद जस्टिस लोया की मौत की सुनवाई को लेकर भी कही तरह की बातें कही गई थी। जस्टिस लोया की मौत की जांच और सुनवाई पर टिप्पणी के बाद जस्टिस अरूण मिश्रा ने खुद को जस्टिस लोया के केस की सुनवाई से अलग कर लिया था। वहीं जस्टिस अरूण मिश्रा की बेंच के फैसले पर रोक लगाने वाली बेंच में शामिल जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।

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जस्टिस अरूण मिश्रा, जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस एमएम शांतानागौदार की बेंच ने 8 फरवरी को एक फैसला दिया कि सरकारी एजेंसी अगर अधिग्रहण की गई भूमि के मालिक को मुआवजे की पेशकश करें और मालिक मुआवजा लेने से मना कर दे तो इसे मुआवजा देना ही माना जाएगा। इस आधार पर मालिक मुआवजा नहीं मिलने की बात कहकर भूमि अधिग्रहण रद्द नहीं कर सकता है। इस फैसले को जस्टिस एमबी लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच को भ्ोजा जाना चाहिए। गौरतलब है कि 2014 में भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा था कि मुआवजा नहीं देना भूमि अधिग्रहण रद्द करने का आधार बनेगा।

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हालांकि एक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट दो बेंचों में टकराव का मामला अब बढ़ता जा रहा है। जस्टिस अरूण मिश्रा के समर्थन देने के लिए अन्य जजों ने भी इसी प्रकार के मामले की सुनवाई से अपने आप को अलग कर लिया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने भी भूमि अधिग्रहण के एक मामले से खुद को अलग कर, मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है।
मामला क्या है?

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