संजीवनी टुडे

राज्य के बंद हो सकते हैं 408 उद्योग, रायपुर प्रदूषण के मामले में नाजुक

संजीवनी टुडे 17-07-2019 22:38:07

प्रदूषण फैलाने वाले रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ राज्य के 408 उद्योग बंद किए जा सकते हैं।


रायपुर। प्रदूषण फैलाने वाले रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ राज्य के 408 उद्योग बंद किए जा सकते हैं। छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल के अनुसार राज्य में रेड और ऑरेंज श्रेणी के 408 उद्योग है। केंद्रीय पर्यावरण मंडल ने रायपुर को प्रदूषण के मामले में नाजुक शहरों में शामिल किया है।ज्ञात हो कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रिंसिपल बेंच ने प्रदूषण के खिलाफ कठोर फैसला दिया है। आदेश के अनुसार रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए सभी को प्रारंभिक तौर पर 1-1 करोड़ क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा गया है।


प्रदूषण इंडेक्स में रायपुर को 70.77 नंबर मिले हैं। 70 नंबर से अधिक नंबर वाले क्रिटिकल इंडेक्स में आते हैं। जबकि भिलाई और कोरबा प्रदूषण में सुधार की वजह से इस सूची से बाहर हो गए हैं। 10 जुलाई को दिए गए इस आदेश में एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल ने देश के 100 शहरों के प्रदूषित औद्योगिक एरिया कलस्टर में प्रदूषण फैला रहे ऐसे उद्योगों को बंद करने और उनके विरुद्ध अभियोग चलाने के आदेश दिए हैं। वर्ष 2016 की केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल की सूची में रायपुर के इंडस्ट्रियल  कलस्टर को सामान्य प्रदूषित श्रेणी में रखा गया था और कोरबा को अधिक प्रदूषित श्रेणी में रखा गया था। आज की स्थिति में रायपुर में वायु प्रदूषण मानक से भी नीचे आ गया है। 

एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की गई वर्ष 2018 की सूची में रायपुर का स्थान देश के 100 प्रदूषित शहरों में से 37 वें स्थान पर है। इसके बाद 76 वें स्थान पर कोरबा और 93 स्थान पर भिलाई-दुर्ग है।उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण  मंडल के आंकड़ों के अनुसार राज्य में बड़े तथा मध्यम उद्योगों में से 360 रेड तथा 48 ऑरेंज श्रेणी में रखे गए हैं। लघु उद्योगों में से 1127 रेड तथा 3438 ऑरेंज श्रेणी में रखे गए हैं। एनजीटी ने स्पष्ट कह दिया है कि केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का  सत्यापन करने की आवश्यकता नहीं है। उसने यह भी आदेश दिया है ऐसे उद्योग जो कि एक से ज्यादा मापदंडों में नहीं आते हैं परंतु अन्य मापदंडों जैसे पानी,वायु या अन्य क्षेत्र में प्रदूषण फैला रहे हैं उन्हें राज्य के पर्यावरण सुरक्षा मंडल चिन्हित करके अगले 3 माह में एनजीटी को रिपोर्ट करेंगे। उसने यह भी स्पष्ट आदेश दिया है कि राज्य के पर्यावरण संरक्षण मंडल विभिन्न अधिनियम के तहत अगले 3 माह में आदेश का क्रियान्वयन करके एनजीटी को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

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