संजीवनी टुडे

नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में विकसित कृषि यंत्र को मिली ख्याति, निर्माण में इनका रहा विशेष योगदान

संजीवनी टुडे 11-07-2019 22:15:05

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने "उन्नत सीड ड्रिल अवरोध (चोक) सूचक यंत्र" का निर्माण किया


नई दिल्ली। किसानों के लिए ट्रेक्टर की सहायता से खेतों में बीज बोने एवं उर्वरक डालने के लिए उन्नत कृषि यंत्र की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में "आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है" के जुमले को साकार करते हुए प्रदेश के जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने "उन्नत सीड ड्रिल अवरोध (चोक) सूचक यंत्र" का निर्माण किया और इस यंत्र का पेटेंट कराया। इसका पेटेंट नंबर 232368 है।

उन्नत सीड ड्रिल अवरोध (चोक) सूचक यंत्र की खासियतों और तमाम तकनीकी पहलुओं के उत्कृष्ट मापदंडों पर खरा पाये जाने तथा किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए, इस उन्नत यंत्र की खूबी से देश के बड़े कृषि वैज्ञानिक भी चमत्कृत हैं।  इस उपकरण की इन्हीं तमाम खूबियों की वजह से भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट डीएसटी डॉट जीओव्ही डॉट इन के होमपेज में "उन्नत सीड ड्रिल अवरोध (चोक) सूचक यंत्र" को प्रदर्शित किया गया है। इस होमपेज में चुनिंदा और उत्कृष्ट उपकरणों को ही स्थान दिया जाता है।

जवाहरलाल नेहरू कषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीके बिसेन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस यंत्र के निर्माण के लिए नेशनल एग्रो इंडस्ट्रीज लुधियाना (पंजाब) के साथ कृषि विश्वविद्यालय ने औद्योगिक भागीदारी की है। इस यंत्र का सफल परीक्षण कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रक्षेत्रों में बुआई के लिए किया जा चुका है, साथ ही इसकी कार्यप्रणाली का प्रदर्शन विभिन्न किसान मेलों और कृषि छात्रों के प्रशिक्षण के दौरान भी किया जा चुका है। इस यंत्र के निर्माण एवं विकास में विश्वविद्यालय के संचालक उपकरण डॉ. एके राय (पीआई) के साथ डॉ. केबी तिवारी (सीओपीआई), इंजीनियर भारती दास, इंजीनियर प्रेम रंजन, इंजीनियर शुभम् साहू एवं एच.सी. झा का विशेष योगदान रहा है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके राय ने बताया कि इस यंत्र का प्रयोग बीज और उर्वरक डालने में किया जाता है। बुआई के समय मिट्टी में नमी अधिक होने या अन्य कारणों से चैनल अवरोधित हो जाते हैं। अवरोधों की निगरानी के लिए चालक के अलावा एक मजदूर रखना पड़ता था। फिर भी कई बार अवरोधों का पता काफी देर से चलता था, जिससे खेत का बड़ा हिस्सा बीज एवं उर्वरक से वंचित रह जाता था। इससे फसल का उत्पादन प्रभावित होता था।

उन्नत सीड ड्रिल यंत्र के प्रयोग से किसानों को चैनल के अवरोध और बीज एवं उर्वरक बॉक्स खाली होने का पता तुरंत चल जाता है और उसी समय चालक अवरोध को दूर कर लेता है। इसमें अतिरिक्त मजदूर की भी जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही खेत में हर जगह एक समान बुआई होती है। कम लागत में विकसित यह यंत्र अपनी कम कीमत की वजह से किसान भाइयों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। यह जानकारी गुरुवार को सहायक जनसम्पर्क अधिकारी मनोज कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया को दी।

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