संजीवनी टुडे

राजनीतिक हिंसा की आग में जल रहा दक्षिण 24 परगना, तृणमूल और माकपा कार्यकर्ता की हत्या

संजीवनी टुडे 04-07-2020 21:46:22

नगरपालिका चुनाव जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा बढ़ती जा रही है। अब राजधानी कोलकाता से सटा दक्षिण 24 परगना क्षेत्र हिंसा की चपेट में है।


कोलकाता। नगरपालिका चुनाव जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा बढ़ती जा रही है। अब राजधानी कोलकाता से सटा दक्षिण 24 परगना क्षेत्र हिंसा की चपेट में है। यहां के मैपीठ इलाके में तृणमूल कांग्रेस के एक युवा नेता की पीट-पीटकर हत्या की गई है। इसका आरोप वाममोर्चा के घटक दल एसयूसी के कार्यकर्ताओं पर लगा है। हत्या भी मामूली बात के लिए हुई है। इलाके में सड़क निर्माण का काम चल रहा था, जिसमें शामिल मजदूरों ने अस्थाई टेंट लगाया था। निर्माण कार्य पूरा हो गया है तो टेंट निर्माण के लिए जो त्रिपाल लगाया गया था, वह तृणमूल कांग्रेस के लोग लेंगे या माकपा के लोग लेंगे, इसी को लेकर शुक्रवार को विवाद की शुरुआत हुई थी। 

दोनों ही गुटों में जमकर हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद शनिवार सुबह घायल तृणमूल कार्यकर्ताओं में से एक की मौत हो गई है। घटना इलाके के मैपीठ क्षेत्र की है। उसके बाद शनिवार को गुस्साए तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में माकपा तथा उसके सहयोगी संगठनों से जुड़े लोगों के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर दी। कई दुकानों में आग लगा दी गई। इधर शनिवार सुबह के समय मैपीठ इलाके में ही एसयूसी के एक कार्यकर्ता का फंदे लटकता शव भी बरामद किया गया है। इसके लिए माकपा मे तृणमूल कांग्रेस को दोषी ठहराया है और उधर तृणमूल कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या के लिए माकपा कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया है। 

माकपा की राज्य इकाई के सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने 24 घंटे का समय दिया है और चेतावनी दी है कि अगर हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो राज्य भर में रविवार को विरोध प्रदर्शन होगा। इधर तृणमूल कांग्रेस ने माकपा कार्यकर्ता की हत्या से अपने कार्यकर्ताओं का किसी भी तरह से संबंध होने से इनकार कर दिया है। माकपा भी दावा कर रही है कि तृणमूल कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या मामले में उनके कार्यकर्ताओं का कोई लेना देना नहीं है। क्षेत्र के लोगों से राशन वितरण और अन्य सुविधाएं देने के नाम पर लगातार वसूली होती है। इससे स्थानीय लोग तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से नाराज हैं और इसीलिए पीट-पीटकर मौत के घाट उतारे हैं।

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