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हाशिए पर खड़े वर्गों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान लोकसेवकों का मूल उद्देश्य : उप राष्ट्रपति

संजीवनी टुडे 07-08-2020 18:00:19

हाशिए पर खड़े वर्गों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान लोकसेवकों का मूल उद्देश्य


नई दिल्ली। उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के युवा प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि हाशिए पर खड़े वर्गों का सामाजिक और आर्थिक उत्थान लोकसेवकों का मूल उद्देश्य होना चाहिए। उप राष्ट्रपति वेंकैया ने आज लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के 2018 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा प्रशिक्षुओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने कार्य को गरीब-अमीर, स्त्री-पुरुष, शहर-गावों के बीच अंतर को मिटाने के मिशन के रूप में लें और नए भारत के लिए परिवर्तन के कारक के रूप में कार्य करें।

सरदार पटेल के स्वप्न को याद दिलाते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने एक ऐसी सिविल सेवा की अपेक्षा की थी जो गरीबी और भेदभाव से लड़कर एक नए भारत के उत्थान के लिए काम करे। उप राष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे अपने काम में सत्य निष्ठ, अनुशासित, कर्मठ, जवाबदेह, पारदर्शी बनें और सादगी का जीवन व्यतीत करें। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक महान नेता थे, सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, कर्मठता, करुणा, राष्ट्र भाव और साहस जैसे गुण उनके चरित्र में रचे-बसे थे। उप राष्ट्रपति ने कहा कि यद्यपि विधायिका कानून और नीतियां बनाती है फिर भी उनको जमीन पर कैसे लागू किया जाता है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। यह जिम्मेदारी प्रशासकों की है कि लोगों को उनके अधिकार और उनके लिए अधिकृत सुविधाएं बिना किसी देरी के जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाएं। 

नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दिया मंत्र 'परफॉर्म, रिफॉर्म, ट्रांसफॉर्म' युवा अधिकारियों को नए प्रयोग करने की प्रेरणा देगा और वे बेहतर से बेहतर अधिकारी के रूप में प्रगति करते जायेंगे। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से हो रहे परिवर्तनों के दौर में है, महामारी के बावजूद विकास और आत्मनिर्भरता के ऐसे अनेक नए अवसर हैं जो हमारे विकास की प्रक्रिया को किसी भी आपदा से निरापद रख सकते हैं। 

उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि वे आगे बढ़कर बदलते हुए नए भारत का नेतृत्व करें। नया भारत समावेशी है, उसमे जीवन की गुणवत्ता है, लोकतान्त्रिक मर्यादाओं को सुदृढ किया जा रहा है, जन कल्याण के संस्थानों को सशक्त बनाया जा रहा है। भाषा की चर्चा करते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशासन की भाषा स्थानीय लोगों की आम भाषा होनी चाहिए। उन्होंने इस बात की सराहना की कि अधिकारी अपने प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय भाषा सीखते हैं। उप राष्ट्रपति ने इस अवसर पर लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी द्वारा प्रकाशित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम के संकलन, "सिक्सटी फाइव कन्वर्सेशन" का लोकार्पण भी किया। एकेडमी के निदेशक संजीव चोपड़ा तथा फैकल्टी के अन्य सदस्य इस वर्चुअल समापन समारोह के अवसर पर उपस्थित रहे।

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