संजीवनी टुडे

छठा चरण : भाजपा को गढ़ तो महागठबंधन को साख बचाने की चुनौती

संजीवनी टुडे 08-05-2019 12:08:07


लखनऊ। यूपी के छठें चरण में सभी दलों ने प्रचार के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। इन सीटों में आजमगढ़ में सपा जीती थी और जब फूलपुर में उप चुनाव हुआ तो वहां भी सपा को जीत मिली। इन दोनों सीटों को छोड़कर कुछ भी विपक्ष के पास खोने के लिए नहीं है, जबकि भाजपा के पास अपनी साख बचाने की चुनौती पहाड़ जैसी खड़ी है। 

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 इस कारण छठें चरण में 14 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं अपनी साख बचाने के लिए सपा-बसपा प्रमुखों के बोल बिगड़ते जा रहे हैं। दोनों दलों के नेताओं को अपने-अपने दलों के वोट खिसकते नजर आ रहे हैं। भदोही में सपा का वोट बैंक कांग्रेस की तरफ सिफ्ट होता देख मायावती वहां अपने उम्मीदवार काे जीताने के लिए अखिलेश यादव को लेकर पहुंच गयी और स्पष्ट किया कि कांग्रेस उम्मीदवार अखिलेश यादव का खास बता रहे हैं। इस कारण अखिलेश यादव काे लेकर आयी हूं। वहीं इस चरण में कई सीटों पर कांग्रेस वोट कटवा की भूमिका में ही है।

इलाहाबाद में वोट कटवा की भूमिका में कांग्रेस
छठें चरण के चुनाव पर नजर दौड़ायें तो इलाहाबाद लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार राज्य सरकार में मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी चुनाव लड़ रही हैं। पिछली बार वहां भाजपा के श्यामा चरण गुप्ता चुनाव जीते थे लेकिन इस बार वे सपा में शामिल हो गये। श्यामा चरण गुप्ता को 3,13,772 वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर 2,51,763 मत पाकर सपा के कुंवर रेवती रमण सिंह रहे। ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या ज्यादा होने के कारण इस बार भाजपा ने रीता बहुगुणा जोशी पर दांव लगाया है लेकिन भाजपा को ही छोड़कर कांग्रेस में गये योगेश शुक्ला काे उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने भाजपा के मतों में सेंधमारी का काम किया है।

सुलतानपुर : वरूण से जो हारे थे, मां का वे कर रहे प्रचार
गांधी परिवार से केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी सुलतापुर सीट पर भाजपा से चुनाव लड़ रही हैं। इस कारण यह सीट भी काफी चर्चा में है। इस सीट पर पिछली बार वरूण गांधी चुनाव जीते थे लेकिन इस बार भाजपा ने इस सीट पर उनकी मां को उम्मीदवार बनाया है। यहां पिछली बार वरूण गांधी का चुनाव प्रचार करने वाले चंद्रभद्र सिंह इस बार बसपा के टिकट पर उनकी मां के सामने चुनाव मैदान में हैं। वे दबंग नेता के रूप में जाने जाते हैं। पिछली बार वरूण गांधी 4,10,338 मत पाये थे, जबकि 2,31,446 मत पाकर बसपा के पवन पांडेय दूसरे स्थान पर रहे। इस बार पवन पांडेय बसपा में रहते हुए भी मेनका गांधी का प्रचार कर रहे हैं। वही कांग्रेस ने संजय सिंह पर दांव लगाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की फिराक में है लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है।

आजमगढ़ : अखिलेश यादव को निरहुआ दे रहा कड़ी टक्कर
पूर्वांचल की आजमगढ़ सीट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं। इनको टक्कर देने के लिए भाजपा ने भोजपुरी के सीने स्टार निरहुआ को मैदान में उतारा है। निरहुआ ने जो पर्चा दाखिला से पूर्व जो अभूतपूर्व रोड-शो किया था। उसके बाद से उसका क्षेत्र में समा बंध गया है। हार-जीत का पता तो 23 मई को ही चल पाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि निरहुआ कड़ी टक्कर दे रहा है। पिछली बार 2014 में यहां से मुलायम सिंह यादव भाजपा के रमाकांत यादव को हराकर चुनाव जीते थे।

फूलपुर : भाजपा को राष्ट्रवाद पर तो गठबंधन को जातिगत आंकड़ों पर भरोसा
फूलपुर लाेकसभा सीट भी भाजपा के लिए काफी चुनौती पूर्ण है, क्योंकि 2014 में भाजपा के खाते में गयी इस सीट पर उप चुनाव में सपा ने कब्जा जमा लिया था। इस बार सपा से सीट को पुन: वापस लेने के लिए भाजपा एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। इस सीट पर बीजेपी ने केशरी देवी पटेल को उम्मीदवार बनाया है। वहीं यादव बाहुल्य सीट पर महागठबंधन ने पंधारी यादव को मैदान में उतारा है। 2014 में केशव प्रसाद मौर्य इस सीट से तीन लाख से ज्यादा मतों से विजयी हुए थे। भाजपा जहांं राष्ट्रवाद के नाम पर मतों के ध्रूवीकरण की आस लगाये बैठी है, वहीं गठबंधन जातिगत आंकड़ों पर विश्वास कर रही है। इस सीट पर ढाई लाख यादव मतदाता, दो लाख मुस्लिम, दो लाख कुर्मी, डेढ लाख ब्राह्मण, दो लाख प्रजापति, एक लाख मौर्य मतदाताा है। 

प्रतापगढ़ : ब्राह्मण मतदाता को उतारकर महागठबंधन ने की जातिगत ध्रूवी करण की काेशिश
प्रतापगढ़ सीट पर कांग्रेस से विदेश मंत्री रहे राजा दिनेश सिंह संसद पहुंचते रहे हैं लेकिन 1998 में पहली बार बीजेपी ने राम विलास वेदांती उतारकर यहां कमल खिलाने में कामयाब रही। 2014 में गठबंधन के खाते में रही सीट पर अपना दल के उम्मीदवार ने इस सीट को कांग्रेस उम्मीदवार रत्ना रानी से छिन लिया। इस बार भाजपा के संगम लाल गुप्ता, महागठबंधन के अशोक त्रिपाठी और कांग्रेस उम्मीदवार रत्ना रानी सिंह के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। 

 संगम लाल गुप्ता वर्तमान में प्रतापगढ़ सदर से विधायक हैं। इस सीट पर राजपूत और कुर्मी मतदाताओं के अलावा ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। पिछली बार अपना दल के कुंवर हरिबंश सिंह  को 3,75,789 वोट मिले थे, जबकि बसपा के सिफ निजामुद्दीन सिद्दीकी को 3,09,858 वोट मिले। कांग्रेस की राजकुमारी रत्ना सिंह को 1,38,620  वोट मिले थे।

अम्बेडकर नगर में भाजपा का बदला है उम्मीदवार, श्रावस्ती में दद्दन पर ही दाव 
अम्बेडकर नगर सीट पर पिछली बार भाजपा उम्मीदवार हरीओम पांडेय 4,32,104 मत पाकर विजयी रहे थे, जबकि बसपा उम्मीदवार राकेश पांडेय दूसरे नम्बर पर थे। इस बार मुकुट बिहारी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। श्रावस्ती लोकसभा सीट पर भाजपा ने वर्तमान सांसद दद्दन मिश्रा पर ही दांव लगाया है। उनका संसद में उपस्थिति का रिकार्ड 92 फीसदी रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में दद्दन मिश्रा 345,964 मत पाये थे, जबकि अतीक अहमद के खाते में 260,051 वोट आए थे।

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भदोही : महागठबंधन के लिए कांग्रेस ने बढ़ाई मुश्किल
भदोही में पिछली बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वीरेंद्र सिंह मस्त ने बीएसपी उम्मीदवार को डेढ़ लाख वोटों से हराया था। वीरेंद्र सिंह को 4,03,695 वोट मिले थे, जबकि 2,45,554 वोट पाकर बीएसपी के राकेशधर त्रिपाठी दूसरे पायदान पर रहे थे लेकिन इस बार भाजपा ने उन्हें उनकी सीट बदलकर भदोही से रमेश बिंद को उम्मीदवार बनाया है। बसपा ने इसबार जहां रंगनाथ मिश्र को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने बाहुबली और धनबली रमाकांत यादव को टिकट देकर महागठबंधन के उम्मीदवार के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है।

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