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शिवसेना ने केंद्र सरकार को दी बड़ी नसीहत, कहा- कृषि कानून रद्द करके किसानों का सम्मान करें पीएम मोदी

संजीवनी टुडे 14-01-2021 17:59:08

शिवसेना ने सामना में आगे लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों का स्थगनादेश दे दिया है। फिर भी किसान आंदोलन पर अड़े हुए हैं।


नई दिल्ली। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 49वां दिन है। किसानों के इस शांत आंदोलन की ‘ताकत’ भी लगातार बढ़ती जा रही है। ठंड और बारिश की परवाह किए बिना हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से किसानों के जत्थे रसद के साथ लगातार धरनास्थल पर पहुंच रहे हैं। इस बीच शिवसेना ने केंद्र सरकार को दी बड़ी नसीहत देते हुए कहा कि कृषि कानून रद्द करके पीएम मोदी को किसानों का सम्मान करना चाहिए। 

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के माध्यम से कहा, 'किसानों की हिम्मत और जिद का प्रधानमंत्री मोदी को स्वागत करना चाहिए और कृषि कानून रद्द करके किसानों का सम्मान करना चाहिए। मोदी आज जितने बड़े हैं, उससे भी बड़े हो जाएंगे। मोदी, बड़े बनो।'

kisan aandolan

शिवसेना ने सामना में आगे लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों का स्थगनादेश दे दिया है। फिर भी किसान आंदोलन पर अड़े हुए हैं। अब सरकार की ओर से कहा जाएगा- ‘देखो, किसानों की अकड़, सर्वोच्च न्यायालय की बात भी नहीं मानते।’ लेकिन सवाल सर्वोच्च न्यायालय के मान-सम्मान का नहीं है, बल्कि देश की  कृषि संबंधी नीति का है। 

सामना में आगे लिखा कि किसानों की मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द करो, निर्णय सरकार को लेना है। सरकार ने न्यायालय के कंधे पर बंदूक रखकर किसानों पर चलाई है लेकिन किसान हटने को तैयार नहीं हैं। किसान संगठनों और सरकार के बीच जारी चर्चा रोज असफल साबित हो रही है। 

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उधर, भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद भूपिंदर सिंह मान गुरुवार को कृषि कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी से अलग हो गए हैं। उन्होंने एक पत्र लिखकर यह जानकारी दी है। उन्होंने पत्र में सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए लिखा है कि वे हमेशा पंजाब और किसानों के साथ खड़े हैं। मान ने कहा, 'केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कानूनों पर किसान संगठनों से बातचीत शुरू करने के लिए बनाई गई चार सदस्यीय कमेटी में मुझे शामिल करने के लिए मैं सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करता हूं। एक किसान और खुद यूनियन लीडर के रूप में, आम जनता के बीच पैदा हुईं भावनाओं और आशंकाओं के मद्देनजर, मैं पंजाब या किसानों के हितों से समझौता नहीं करने के लिए दिए गए किसी भी पद से अलग होने के लिए तैयार हूं। मैं अपने आप को कमेटी से अलग करता हूं। किसानों और पंजाब के साथ हमेशा खड़ा रहूंगा।'

बता दें कि आंदोलनकारी किसान 28 नवंबर से यूपी गेट पर डेरा डाले हुए हैं और 3 दिसंबर से NH-9 के गाजियाबाद-दिल्ली कैरिजवे को भी बंद कर दिया है। इन किसानों की मांग तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाए जाने की है। इसके मद्देनजर दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सिंघु बॉर्डर पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। सरकार के साथ किसानों की 8 दौर की वार्ता हो चुकी है मगर उसके बाद भी कोई हल नहीं निकला है। किसान किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं है।

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