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ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान हुए द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर, सोमवार से शुरू होगी शीतकालीन पूजा

संजीवनी टुडे 22-11-2020 18:42:15

भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के कैलाश से ऊखीमठ आगमन पर सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन कर पुण्य के भागी बने। सोमवार से यहां भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा विधिवत शुरू होगी।


रुद्रप्रयाग। विकासखंड ऊखीमठ की सीमांत ग्राम पंचायत गौण्डार से लगभग 10 किमी दूर हिमालय श्रृंखला के मध्य विराजमान भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मन्दिर में विराजमान हो गयी है। भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के कैलाश से ऊखीमठ आगमन पर सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन कर पुण्य के भागी बने। सोमवार से यहां भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा विधिवत शुरू होगी। 

मदमहेश्वर घाटी के गिरिया गांव में प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग ने ब्रह्म बेला पर पंचाग पूजन के तहत भगवान मदमहेश्वर सहित तैतीस कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया तथा आरती उतारी। उसके बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह मूर्तियों के निर्वाण दर्शन कर विश्व कल्याण की कामना की। ठीक नौ बजे भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मन्दिर के लिए रवाना हुए तथा फाफंज, सलामी यात्रा पड़ावों पर ग्रामीणों ने अनेक प्रकार की पूज्यार्थ सामाग्रियों से अर्घ्य लगाकर मनौती मांगी। ठीक 12 बजे भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली मंगोलचारी पहुंचीं तो रावल भीमाशंकर लिंग के प्रतिनिधि केदार लिंग, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मराठा रेजिमेंट व स्थानीय वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों से डोली की अगुवाई की। भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के मंगोलचारी पहुंचने पर इलाका बाबा मदमहेश्वर के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। 

पौराणिक परम्पराओं के अनुसार मंगोली के ग्रामीणों ने भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली को सामूहिक अर्घ्य अर्पित किया तथा केदार लिंग ने डोली पर सोने का छत्र चढ़ाकर क्षेत्र के खुशहाली की कामना की। भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के ब्राह्मणखोली आगमन पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर डोली का भव्य स्वागत किया तथा कस्तोरा नामक स्थान पर डोली की विशेष पूजा-अर्चना की गयी तथा डंगवाडी गांव आगमन पर ग्रामीणों ने भी अर्घ्य अर्पित किया। दोपहर ढाई बजे भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल ओकारेश्वर मन्दिर पहुंचने पर वहां पहले से मौजूद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर डोली का भव्य स्वागत किया तथा भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान हुई। उसके बाद राॅवल भीमाशंकर लिंग के प्रतिनिधि केदारलिंग ने मदमहेश्वर धाम के प्रधान पुजारी टी गंगाधर लिंग का छह माह तीर्थ में रहने का संकल्प तोड़ा।

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