संजीवनी टुडे

छात्रवृति घोटाला: सीबीआई की एफआईआर के बाद बढ़ी निजी शिक्षण संस्थानों की धुकधुकी

संजीवनी टुडे 09-05-2019 22:44:52


शिमला। केंद्रीय जांच ब्यूरों (सी.बी.आई.) की जांच में करोड़ो के  भ्रष्टाचार के खेल में कई निजि शिक्षण संस्थानों के प्रबंधक नपेंगे। सीबीआई के मामला दर्ज करने के बाद बढ़े निजी शिक्षण संस्थानो के प्रबंधको की धुकधुकी बढ़ गई है। चुंकि सीबीआई की एफआईआर. में कई बढ़े शिक्षण संस्थानों के नामों का है उल्लेख किया है। केंद्रीय जांच ब्यूरों (सी.बी.आई.) ने करोड़ो के छात्रवृति घोटाले की जांच के लिए डीएसपी के नेतृत्व में टीम गठित कर दी है। सीबीआई की टीम जल्द ही कुछ बढ़े निजी शिक्षण संस्थानो पर दबिश देकर रिकार्ड खंगालने की तैयारी में है।

 
सीबीआई प्रारंभिक जांच में शिक्षा निदेशालय, निजी शिक्षण संस्थानो,ं राष्ट्रीयकृत बैंको और सचिवालय से रिकार्ड कब्जे में लेगी  उसके बाद ही प्रदेश सहित बाहरी राज्य में छापामारी का सिलसिला शुरू होगा। सीबीआई सुत्रो की माने तो छात्रवृति घोटाला देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। कई राष्ट्रीयकृत बैंक भी इसमें शामिल हैं। शिक्षा विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि कई निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी एडमिशन दिखाकर सरकारी धनराशि का गबन किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार 80 फीसदी छात्रवृत्ति का बजट सिर्फ  निजी संस्थानों में बांटा गया जबकि सरकारी संस्थानों को छात्रवृत्ति के बजट का मात्र 20 फीसदी हिस्सा मिला। ऐसे में अब सीबीआई के जांच की जद में कई चेहरे आएगें। सीबीआई. की शिमला स्थित शाखा में यह मामला दर्ज किया है।

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छात्रवृत्ति आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी नियमों को ताक पर रखा।  बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19,915 को चार मोबाइल फोन नंबर से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। इसी तरह 360 विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग ही नहीं किया गया है। ,

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दरअसल राज्य सरकार को शिकायत मिली थी कि जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिल रहीं है। ऐसे में शिकातयों को संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने मामले की जांच करवाने का निर्णय लिया। इस दौरान  फर्जी एडमिशन से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर घोटालें होने के तथ्य सामने आए।  घोटाले की राशि 250 करोड़ बताई जा रही है।

 

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