संजीवनी टुडे

SC/ST Act : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा- 7 साल से कम है सजा तो नहीं होगी तत्‍काल गिरफ्तारी

संजीवनी टुडे 12-09-2018 13:39:55


लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पुलिस से कहा कि एक SC/ST महिला और उसकी बेटी पर हमले के आरोपी चार लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के 2014 के एक आदेश द्वारा समर्थित सीआरपीसी के प्रावधानों का पालन किए बगैर गिरफ्तारी नहीं कर सकते। 

आपको बता दें कि यह मामला आईपीसी के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निरोधक) कानून के तहत दर्ज हुआ था, लेकिन न्यायालय ने पुलिस को तत्काल ‘‘नियमित’’ (रूटीन) गिरफ्तारी करने से रोक दिया। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति संजय हरकौली की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।

आपको बता दें कि साल 2014 में उच्चतम न्यायालय ने अर्णेश कुमार के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर दिशानिर्देशों का समर्थन किया था। सीआरपीसी की धारा 41 और 41-ए कहती है कि सात साल तक की जेल की सजा का सामना कर रहे किसी आरोपी को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा जब तक पुलिस रिकॉर्ड में उसकी गिरफ्तारी के पर्याप्त कारणों को स्पष्ट नहीं किया जाता।

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आपको बता दें कि उच्च न्यायालय का आदेश ऐसे समय पर आया है जब अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न निरोधक) कानून संशोधन पर बवाल मचा हुआ है और इस कानून पर संसद ने एक विधेयक पारित किया है। 

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