संजीवनी टुडे

संघ प्रमुख भागवत और मोरारी बापू ने किया प्रताप गौरव केन्द्र पर भक्तिधाम का लोकार्पण

संजीवनी टुडे 26-05-2019 19:12:11


उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और राष्ट्रसंत मोरारी बापू ने टाइगर हिल स्थित प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में नवनिर्मित भक्तिधाम में बने मंदिरों का रविवार शाम को लोकार्पण किया। मंदिरों का यह परिसर फिलहाल प्रताप गौरव केन्द्र में आने वाले पर्यटकों के लिए ही खुला रहेगा। 

भक्तिधाम में नौ मंदिर बनाए गए हैं जिनमें मेवाड़ के आराध्य एकलिंग नाथजी, सांवलिया सेठ, चारभुजा नाथ, श्रीनाथजी, केसरिया जी, द्वारकाधीश जी, राम दरबार, सिद्धि विनायक, चामुंडा माता मंदिर शामिल हैं। मंदिरों में स्थापित प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा पूर्व में 21 पंडितों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार के साथ की जा चुकी है। रविवार शाम को डॉ. भागवत और राष्ट्रसंत मोरारी बापू ने आरती वंदन करके मंदिरों को जन समर्पित किया।

गौरतलब है कि प्रताप गौरव केन्द्र मेवाड़ सहित राष्ट्र के इतिहास को जानने का स्थल है जिसकी नींव 18 अगस्त 2008 को डॉ. भागवत ने ही रखी थी, तब वे सरकार्यवाह थे। डॉ. भागवत ने ही 28 नवम्बर 2016 को लोकार्पण किया था। मेवाड़ की धरा पर मेवाड़ की भक्ति और शक्ति के इतिहास का जीवंत अहसास कराने वाले इस केन्द्र का राष्ट्रीय स्तर पर महत्व है। इसका विशेष कारण यहां स्थापित भारतमाता की प्रतिमा है। जब पर्यटक गौरव केन्द्र पर गौरवशाली अतीत के दर्शन के बाद पहुंचता है तो स्वत: ही देशहित सर्वोपरि के संकल्प को प्रस्तुत हो जाता है। मेवाड़ के इतिहास को कदम-दर-कदम जानने और समझने का अब तक का यह एकमात्र स्थल है। इस केन्द्र ने लघु अवधि में ही इतनी ख्याति प्राप्त कर ली है कि देश के बड़े हस्ताक्षर जब उदयपुर आते हैं तो यहां जाए बिना नहीं रह पाते। यहां की सकारात्मक, संकल्पित और देश को समर्पित शक्ति ही है जो सभी को यहां खींच लाती है। 
29 अगस्त 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने उदयपुर प्रवास के दौरान प्रताप गौरव केन्द्र का अवलोकन किया।  

गौरव केन्द्र सिर्फ मेवाड़ तक ही सीमित नहीं है, यहां भक्त शिरोमणि मीरा बाई के दर्शन भी हैं तो छत्रपति शिवाजी के भी दर्शन हो रहे हैं। फतहसागर झील से महज तीन किमी. की दूरी पर अरावली की पहाड़ी ‘टाइगर हिल’ पर बने इस केन्द्र पर गौरवशाली इतिहास और भारतीय संस्कृति के मूल्यों के दर्शन के साथ हजारों पौधे भी पर्यटकों को सुकून का अहसास कराते हैं। 
दर्शकों को इतिहास की जानकारी के लिए पुस्तकें, चित्र, मोमेन्टो, सी.डी. आदि सामग्री खरीदने का केन्द्र भी है। आने वाला परिवार बच्चों सहित समय, एकाग्रता और निश्चिंत होकर केन्द्र की हर एक प्रदर्शनी को देख सकें, इस सोच के साथ केन्द्र का निर्माण किया गया है। 25 बीघा में बने प्रताप गौरव केन्द्र को सड़क दो हिस्सों में बांटती है। एक हिस्से में ऊंची पहाड़ी है जिस पर महाराणा प्रताप की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा 57 फीट ऊंची 40 टन वजनी अष्ट धातु की बनाई गई है। इस प्रतिमा की ऊंचाई को लेकर भी विशेष कारण रहा है।

केन्द्र से जुड़े कार्यकर्ता बताते हैं कि महाराणा प्रताप 57 वर्ष की आयु तक जीवित रहे, इसलिए इस प्रतिमा की ऊंचाई 57 फुट रखी गई है और बैठी हुई मुद्रा के पीछे उनके राजसंन्यासी और संघर्षपूर्ण जीवन को दर्शाने का उद्देश्य है। प्रतिमा के नीचे से निरंतर जल प्रवाह रखा गया है। इस जल प्रवाह को गंगा मैया के प्रतिरूप में दर्शाया गया है। इस प्रतिमा के समीप ही 500 दर्शकों की क्षमता वाला कुंभा सभागार बनाया गया है जिसमें सेमिनार सहित फिल्म का भी प्रदर्शन भी किया जा सकता है। महाराणा प्रताप की प्रतिमा के सामने वाले हिस्से में मेवाड़ दर्शन दीर्घा सहित हल्दीघाटी विजय युद्ध दीर्घा, मेवाड़ स्फूर्ति दीर्घा, भारत दर्शन दीर्घा, राजस्थान गौरव दीर्घा बनाई गई है। हल्दीघाटी विजय युद्ध दीर्घा में 100 प्रतिमाएं लगाई गईं हैं जो महाराणा प्रताप के शस्त्रागार मायरा की गुफा में गुप्त मंत्रणा से लेकर पूरे हल्दीघाटी युद्ध तक के दृश्य बताती है।

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राजस्थान गौरव दीर्घा में राजस्थान के 24 महापुरुषों की आदमकद प्रतिमाएं लगाकर उनका व्यक्तित्व और कृतित्व लिखा गया है ताकि लोग उनके बारे में जान सकें। इसी तरह मेवाड़ स्फूर्ति दीर्घा में मेकैनिकल झांकियां सजाई गई हैं। 

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