संजीवनी टुडे

आरटीआई में खुलासा : सरकार के पास नहीं है 1947 के विभाजन दंगों में मारे गए लोगों की जानकारी

संजीवनी टुडे 28-06-2019 20:04:26

भारत -पाक विभाजन का दुःख एक बार फिर से हरा हो गया। 72 वर्ष पूर्व विभाजन के समय हुए सम्प्रदायिक कत्लेआम का ब्योरा देश की सरकार के पास नहीं है।


चंडीगढ़। भारत -पाक विभाजन का दुःख एक बार फिर से हरा हो गया। 72 वर्ष पूर्व विभाजन के समय हुए सम्प्रदायिक कत्लेआम का ब्योरा देश की सरकार के पास नहीं है। किस मजहब के कितने लोग इस विभाजन की कीमत के रूप में मौत के घाट उतार दिए गए, इसे संकलित कर पाने में आज़ादी से लेकर अब तक की सरकारें असफल रही हैं। इनमे सबसे अधिक समय कांग्रेस पार्टी की सरकारें रही हैं । उल्लेखनीय है कि इस विभाजन में तकरीबन दो लाख से अधिक लोगों की मौत, लाखों लोग जख्मी और हजारों महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुई थीं। 

पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने 29 अक्तूबर, 2018 को केन्द्रीय गृह मंत्रालय से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से भारत-पाक विभाजन से जुड़े आठ बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। इस आरटीआई के जवाब में केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध नियंत्रण ब्यूरो के उपनिदेशक ए.मोहन कृष्णा ने किसी भी बिंदु की सूचना होने से इनकार किया है। कपूर ने बताया कि सन् 1947 के भारत-पाक विभाजन के वक्त रातों-रात डेढ़ करोड़ से ज्यादा नागरिकों की आबादी को धर्म के आधार पर उजाडक़र शिफ्ट किया गया था। गैर सरकारी आंकड़े के अनुसार इस दौरान सांप्रदायिक हिंसा में दो लाख से ज्यादा निर्दोष नागरिक मारे गए, लाखों लोग घायल हुए, हजारों महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुई। इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा कि भारत सरकार के पास इस बारे कोई रिकार्ड या सूचना तक नहीं है। पिछले 72 वर्षों में केन्द्र में सतारूढ़ रही किसी भी सरकार ने विभाजन की बलिवेदी पर चढ़ाए गए लाखों निर्दोष नागरिकों का कोई लेखा-जोखा नहीं रखा।

आरटीआई से जो जानकारी मांगी गई थी
--वर्ष 1947 में भारत पाक विभाजन के दौरान हिन्दू-मुस्लिम दंगों में वर्तमान पाकिस्तान के क्षेत्र से वर्तमान भारत में माइग्रेशन के समय कितने हिंदू मारे गए। संख्या की सूचना, शहर अनुसार तथा जिले के उल्लेख सहित।
--उपरोक्त सूचना तत्कालीन भारत से वर्तमान पाकिस्तान में माइग्रेट होने वाले मुस्लिमों के संदर्भ में भी दी जाए। 
--उक्त सूचना सिक्खों व अन्य के संदर्भ में भी दी जाए।
--इन दंगों में मारे गए भारतीय नागरिकों को भारत सरकार ने स्वतन्त्रता सेनानी, शहीद अथवा कुछ और क्या माना। तस्लीम किया? जो भी माना उसकी सूचना दी जाए। दोनों ओर से माइग्रेट हुए कुल नागरिकों की संख्या की सूचना। 
--भारत सरकार ने उक्त साम्प्रदायिक हिंसा में मारे गए उक्त भारतीय नागरिकों के आश्रितों को क्या-क्या आर्थिक व अन्य सहायता दी?
--उक्त विभाजन के दौरान हुई हिंसा में मारे गए भारतीय नागरिकों की इन दुखद मौतों के पश्चात तत्कालीन भारत सरकार द्वारा गठित कमेटी/आयोग/कमीशन की रिपोर्ट व इस पर की गई कारवाई की रिपोर्ट की छाया प्रति।
--तत्कालीन केन्द्रीय गृह मंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित पूरे केन्द्रीय मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के नाम, पदनाम की सूचना। --भारत के वर्ष 1947 में विभाजन के निर्णय में शामिल ब्रिटिश व भारतीय नेताओं के नाम, पदनाम की सूचना व संबंधित दस्तावेज की सत्यापित छाया प्रति।

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