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अपने आखिरी दौर में पहुंची कोरोना वैक्सीन की रिसर्च, पीएम मोदी ने कहा- वही मिलेगी जो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी

संजीवनी टुडे 25-11-2020 10:10:57

प्रधानमंत्री ने बताया कि वैक्सीन आने के बाद यही प्राथमिकता हो कि सभी तक पहुंचे। अभियान बड़ा होगा और लंबा चलने वाला है।


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना के मामले बढ़ते देख मंगलवार को बीते 8 महीने में नौवीं बार मुख्यमंत्रियों की बैठक ली। मंगलवार को 9 राज्यों के सीएम के साथ करीब चार घंटे चली इस मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री बोले- ‘अभी यह तय नहीं है कि कोरोना वैक्सीन की एक डोज देनी होगी या दो। उसकी कीमत क्या होगी, यह भी तय नहीं है। अभी ऐसे किसी भी सवाल का जवाब हमारे पास नहीं हैं। 

हालांकि, प्रधानमंत्री ने वैक्सीन आने के बाद की बात जरूर की। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बारे में तो वैज्ञानिक ही बताएंगे, लेकिन हमें वैक्सीन आने के बाद की तैयारी अभी से करनी होगी। यानी उसका स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन।

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मोदी ने कहा- वैक्सीन की रिसर्च आखिरी दौर में पहुंची है। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। भारत सरकार हर डेवलपमेंट पर बारीकी से नजर रख रही है। अभी यह तय नहीं है कि वैक्सीन की एक डोज होगी, दो डोज होगी। कीमत भी तय नहीं है। इन सवालों के जवाब हमारे पास नहीं हैं। वैज्ञानिक हैं, जो वैक्सीन बनाने वाले हैं। कॉरपोरेट वर्ल्ड का भी कंपटीशन है। हम इंडियन डेवलपर्स और दूसरे मैन्यूफैक्चरर्स के साथ भी काम रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि वैक्सीन आने के बाद यही प्राथमिकता हो कि सभी तक पहुंचे। अभियान बड़ा होगा और लंबा चलने वाला है। हमें एकजुट होकर एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा। वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो बड़े-बड़े देशों को नहीं। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर राज्यों के साथ मिलकर खाका रखा गया है। फिर भी ये निर्णय तो हम सब मिलकर करेंगे।
 
3. राज्यों और उनके मुख्यमंत्रियों पर
मोदी बोले- हम सब जानते हैं कि हम वैज्ञानिक नहीं हैं। व्यवस्था के तहत जो चीज आती है, उसी को स्वीकार करना होगा। मन में जो योजना हो, खासतौर पर वैक्सीन के संबंध में कि कैसे नीचे तक ले जाएंगे। राज्यों का अनुभव काम आएगा। वैक्सीन अपनी जगह पर है, वो काम होना है और करेंगे। थोड़ी सी भी ढिलाई कोरोना के खिलाफ लड़ाई में नहीं आनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि एक समय था कि अनजान ताकत से लड़ने की चुनौती थी। देश के संगठित प्रयासों से इसका सामना किया गया। नुकसान कम से कम रखा गया। रिकवरी और फैटेलिटी रेट के मामले में भारत संभली हुई स्थिति में है। टेस्टिंग और ट्रीटमेंट का बहुत बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। टेस्टिंग का दायरा बढ़ाना है। फैटेलिटी रेट 1% और पॉजिटिविटी रेट 5% के दायरे में रखना है।

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प्रधानमंत्री ने बताया कि कोरोना के दौरान भारत के लोगों का व्यवहार भी अलग-अलग चरणों में अलग-अलग रहा है। पहले चरण में डर था। दूसरे चरण में भय के साथ संदेह भी जुड़ा। बीमारी की वजह से समाज से कटने का डर भी लगने लगा। लोग संक्रमण को छिपाने लगे। तीसरे चरण में काफी हद तक समझने लगे और संक्रमण को बताने लगे। आसपास लोगों को समझाने लगे। चौथे चरण में कोरोना से रिकवरी का रेट बढ़ा तो लोगों को लगा कि वायरस कमजोर हो गया, नुकसान नहीं कर रहा है। बीमार हो भी गए तो ठीक हो जाएंगे, इसकी वजह से इस स्टेज में लापरवाही बढ़ गई है।

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मोदी ने कहा- त्योहारों से पहले मैंने हाथ जोड़कर प्रार्थना की थी कि कोई दवाई-वैक्सीन नहीं है और आप ढिलाई मत बरतिए। चौथे चरण में जो गलती की हैं, हमें उन्हें सुधारना होगा। हमें तो कोरोना पर ही फोकस करना है। अब हमारे पास टीम तैयार है। जो-जो चीज तैयार करें, उसे इम्प्लीमेंट करें। ना कोरोना बढ़े और ना कोई गड़बड़ हो। आपदा के गहरे समुद्र से निकलकर हम किनारे की तरफ बढ़ रहे हैं। ऐसा न हो जाए कि हमारी कश्ती वहां डूबी, जहां पानी कम था। हमें वो स्थिति नहीं आने देनी है।

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