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गणतंत्र दिवस विशेष: भगत सिंह ने फांसी पर चढऩे से पहले लिखे पत्र में ऐसा क्या लिखा है जो....

संजीवनी टुडे 22-01-2018 19:02:35

Republic Day special Bhagat Singh wrote in the letter written before the hanging what is written in it

डेस्क। संजीवनी टूडे की ओर से चलाई जा रही गणतंत्र दिवस विशेष की श्रृंखला की तीसरी कड़ी में आज बात भगत सिंह की। इसमें आपको वो पत्र भी हूबहू उपलब्ध कराया जा रहा जो उन्होंने फांसी पर चढऩे से पहले देश के नाम लिखा था। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को हुआ था। उनकी दिलेरी के किस्से आज हर भारतीय की जुबान पर है। वे अपनी मातृभूमी की खातिर हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले से लगा लिया।

bhagat singh

भगत सिंह को पहली बार 1927 में गिरफ्तार किया गया था। बात यह थी कि अक्टूबर 1926 में दशहरे के मौके पर लाहौर में एक बम फटा। इस बम कांड में अग्रज सरकार ने भगत सिंह को 26 मई 1927 को गिरफ्तार किया। भगत सिंह को जेल में रखा गया और उनपर अदालत में केस चला। हालांकि सबूतों के अभाव में कुछ हफ्तों के बाद ही 60 हजार रुपए की जमानत पर रिहा कर दिया।

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बात साल 1928 की है जब 30 अक्टूबर को साइमन कमीशन लाहौर पहुंचा, लाला लाजपतराय की अगुवाई में लोगों ने विरोध किया। उस समय सुप्रीटेंडेंट जेम्स ए स्कॉट ने विरोध कर रहे लोगों पर लाठी चलाने का आदेश दिया। इस लाठीचार्ज में लाला लाजपतराय बुरी तरह घायल हो गए और 18 दिन बात उनकी मौत हो गई। लाजपतराय की मौत से देश के क्रातिंकारी युवाओं में स्कॉट के खिलाफ बारी गुस्सा था।

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भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर ने तय किया कि लाला लाजपतराय की मौत का बदला लिया जाएगा। इन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर स्कॉट को मारने की तैयारी कर ली। प्लान के अनुसार स्कॉट को मारने के लिए 17 दिसंबर 1928 का दिन तय हुआ। भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर की तैयारी पूरी थी, प्लान के मुताबिक उन्होंने गोलियों की बौछार भी की लेकिन वह गोलियां स्कॉट के बजाय जॉन पी सांडर्स को जा लगी। सांडर्स की यूं खुलेआम हत्या से अंग्रेज हूकुमत हिल गई। अग्रेंजी सरकार ने क्रांतिकारियों की धरपकड़ तेज कर दी। हालांकि उस भगत सिंह और राजगुरु वहां से निकलने में कामयाब रहे थे।

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साल 1929, अंग्रेज सरकार ने दो नए बिलों को लाने की मजूंरी दे दी यह दोनों बिल भारत के लोगों के लिए बेहद खतरनाक थे। इसी आहत होकर भगत सिंह ने बहरी-गूंगी अंग्रेज सरकार को जगाने की तैयारी कर ली। अप्रेल का महिना था और यह तय हुआ कि असेंबली में बम फेंका जाएगा। इस काम की जिम्मेदारी बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह को मिली। 8 अप्रैल 1929 को जब दिल्ली की असेंबली में बिल पर बहस चल रही थी, तभी असेंबली के उस हिस्से में, जहां कोई नहीं बैठा हुआ था, वहां दोनों ने बम फेंककर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। असेंबली पर भगत सिंह ने सिर्फ बम ही नहीं फेंका, पर्चे भी फेंके थे। जिसकी पहली लाइन थी, ‘बहरों को आवाज सुनाने के लिए धमाकों के बहुत ऊंचे शब्दों की जरूरत होती है।'पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

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ब्रिटीश सरकार की गिरफ्त में आने के बाद इन लोगों से पुराने हिसाब बराबर करने के लिए सरकारी फाइलों को खंगाला जाने लगा। भगत सिंह को पूरी तरह फंसाने के लिए अंग्रजी सरकार ने पुराने केस खंगालने शुरू कर दिए। भगत सिहं पर असेंबली में बम फेंकने अलाव सांडर्स की हत्या का केस भी चला। उसी समय सुखदेव और राजगुरु भी जेल में थे और तीनों को ही सांडर्स की हत्या का दोषी माना गया। इसके अलावा तीनों पर ही देशद्रोह का केस भी चला।

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7 अक्टूबर 1930 को फैसला सुनाया गया कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटकाया जाने का दिन तय हुआ 24 मार्च 1931। लेकिन अंग्रेज डरते थे कि कहीं बवाल न हो जाए। इसलिए 23 मार्च 1931 को शाम करीब साढ़े सात बजे ही तीनों को लाहौर की जेल में फांसी पर लटका दिया गया। भगत सिंह के डेथ सर्टिफिकेट के मुताबिक, भगत सिंह को एक घंटे तक फांसी के फंदे से लटकाए रखा गया।

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फांसी पर चढऩे से पहले उन्होंने जो खत लिखा था वो है. . .. .

'साथियो! स्वाभाविक है जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए। मैं इसे छिपाना नहीं चाहता हूं लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि कैद होकर न रहूं। मेरा नाम हिन्दुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है। क्रांतिकारी दलों के आदर्शों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है। क्रांतिकारी आदर्शों ने मुझे इतना ऊंचा उठा दिया है कि जीवित रहने की स्थिति में मैं इससे ऊंचा नहीं हो सकता। मेरे हंसते-हंसते फांसी पर चढऩे की सूरत में देश की माताएं अपने बच्चों से भगत सिंह की उम्मीद करेंगी। इससे आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना नामुमकिन हो जाएगा। अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतजार है। कामना है कि यह और नजदीक हो जाए।'

देश 69वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है ऐसे में संजीवनी टूडे विशेष किस्सों को आपसे साझा करने के लिए 'गणतंत्र दिवस विशेष' नाम सें एक श्रृंखला की शुरुआत कर  रहा है। यह खास कार्यक्रम 20 से लेकर 25 जनवरी तक चलेगा। हमारी ओर से की जा रही यह कोशिश अगर आपको अच्छी लगे तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें। हमारेफेसबुक पेज पर कमेंट और मैसेज करके बताएं कि यह आपको कैसा लगा।

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