संजीवनी टुडे

रामजन्मभूमि पर जल्द हो फैसला, रामजन्मभूमि पुजारी और बाबरी मस्जिद मुद्दई ने किया स्वागत

संजीवनी टुडे 12-07-2019 01:45:00

रामजन्मभूमि मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद राम जन्म भूमि परिसर में मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि हम लगातार सुप्रीम कोर्ट से जल्द फैसला सुनाए जाने की मांग कर रहे हैं।


अयोध्या। रामजन्मभूमि मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद राम जन्म भूमि परिसर में मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि हम लगातार सुप्रीम कोर्ट से जल्द फैसला सुनाए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट के आदेश पर रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद के हल के लिए गठित विशेष पैनल की सार्थकता पर भी सवाल उठाया। 

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई में जो निर्णय किया है हम उसका स्वागत करते हैं। 25 जुलाई से सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर लगातार सुनवाई कर अपना फैसला सुनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि न्यायालय का निर्णय हमारे पक्ष में आएगा और अयोध्या में रामलला का मंदिर बनेगा। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि मामले की सुनवाई करते हुए 18 जुलाई तक समझौते के लिए गठित पैनल को अपने रिपोर्ट दाखिल करने के बाद बाद उस रिपोर्ट पर निर्णय देने की बात कही है। अगर इस विवाद का हल आपसी बातचीत से नहीं निकलता है तो 25 जुलाई के बाद से रोजाना इस मामले की सुनवाई होगी । 

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 हमें कोर्ट का फैसला मंजूर - इकबाल अंसारी 
आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर बाबरी मस्जिद मामले की मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा है कि हम तो पहले से ही यह कहते चले आए हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुनाए, लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने 1 पैनल गठित कर इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया था। हमें कोर्ट का फैसला भी मंजूर है, लेकिन अभी तक इस प्रयास का कोई बड़ा फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा है। 

मध्यस्थता पैनल का निर्माण मात्र राम मंदिर केस को उलझाना: मनीष पाण्डेय
हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पाण्डेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल मात्र इसलिए गठित किया है, जिससे राम मंदिर केस को और उलझाया जा सके। समय को टाला जा सके। 1949 में हिंदू महासभा की तत्कालीन जनरल सेक्रेट्री गोपाल सिंह विशारद की पूर्व से डाली गई याचिका का हिंदू महासभा पूर्ण रूप से समर्थन करती है।  उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का कोई भी जज राम मंदिर बाद में फैसला करने के विचार में है ही नहीं इसीलिए वह बार-बार मध्यस्था की बातें करता है।श्री पांडेय नेकहा कि इतिहास गवाह रहा है जब जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्था की बातें की है तब-तब मध्यस्था वार्ताएं फेल सिद्ध हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इतिहास से सबक न लेते हुए जिस तरह राम जन्मभूमि वाद में मध्यस्थता पैनल का गठन किया वह कई शंकाओं को जन्म देता है, जो सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध ही जाता है ऐसा प्रतीत होता है कि सुप्रीम कोर्ट किसी बाहरी दबाव में कार्य कर रहा है।

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