संजीवनी टुडे

राम मंदिर विवाद: अपने हिस्से की जमीन छोड़ने को तैयार शिया वक्फ बोर्ड

संजीवनी टुडे 14-07-2018 11:06:46

नई दिल्ली। शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में मिली एक तिहाई जमीन पर अपना दावा कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ थी मुसलमानों को मिली एक तिहाई जमीन पर उनका हक है, वह देश में शांति, भाईचारा और एकता के लिए अपना एक तिहाई हिस्सा राम मंदिर बनाने के लिए दे रहे हैं। बोर्ड की ओर से ये बात सुनवाई के दौरान कही गई।

जमीयत उलेमा ए हिन्द की ओर से बहस कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि जैसे बामियान में तालिबान ने बुद्ध की मूर्ति तोड़ी थी वैसे ही हिन्दू तालिबानियों ने यहां मस्जिद तोड़ी है। धवन की दलीलें अभी जारी हैं मामले पर 20 जुलाई को फिर सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई कर रहा है कि 1994 के इस्माइल फारुखी फैसले में मस्जिद को इस्लाम का अभिन्न हिस्सा न मानने वाले अंश को दोबारा विचार के लिए संविधानपीठ को भेजा जाए राजीव धवन ने फारुखी फैसले के अंश पर आपत्ति उठाते हुए संविधान पीठ को भेजे जाने की मांग की है। इस पर हिन्दू मुस्लिम दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और एस अब्दुल नजीर की पीठ कर रही है।

अयोध्या में मुसलमानों को हिस्से में मिली जमीन पर अपना दावा करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ थी। उसे मीर बाकी ने बनवाया था जो कि शिया था जो मस्जिद का निर्माण कराता है वही वक्फ करने वाला यानी वाकिफ कहलाता है। पहला मुतवल्ली मीर बाकी था और वहां पर ज्यादातर शिया मुतवल्ली ही रहे।

सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से मुसलमानों को मिली एक तिहाई जमीन पर शिया वक्फ बोर्ड का हक है और देश में शांति और भाईचारे के लिए वे अपना एक तिहाई हिस्सा हिन्दुओं को मंदिर बनाने के लिए देते हैं।

उधर हिन्दू महासभा की ओर से पेश वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि मुस्लिम पक्षकार इस्माइल फारुखी फैसले में मामला उलझा कर सुनवाई में देर करना चाहते हैं। यहां सवाल ये है कि ये संपत्ति भगवान रामलला की है या वक्फ प्रापर्टी है। कुछ अन्य हिन्दू पक्षों ने भी फारुखी मामला बड़ी पीठ को भेजने का विरोध किया। 

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धवन ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पक्ष रखे जाने का विरोध किया। कहा कि यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में कहा था कि वह तटस्थ रहेगी उसने इस बात का उल्लंघन किया है। इसके अलावा यूपी की ओर से एएजी ने पेश होकर पक्ष रखा है।

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