संजीवनी टुडे

बंगाल के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल, एक ही पद पर दो की नियुक्ति

संजीवनी टुडे 13-07-2019 18:31:24

विगत कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल राज्य शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। अब शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के चेयरमैन सौमित्र सरकार पर एक नवनियुक्त प्रधानाध्यापक को धमकी देने का मामला प्रकाश में आया है।


कोलकाता। विगत कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल राज्य शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। अब शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के चेयरमैन सौमित्र सरकार पर एक नवनियुक्त प्रधानाध्यापक को धमकी देने का मामला प्रकाश में आया है। नंदीश नियोगी नाम के पीड़ित ने शनिवार को बताया कि प्रधानाध्यापक के तौर पर उन्हें जिस स्कूल में नियुक्त किया गया वहां पहले से ही इस पद पर एक शिक्षक की नियुक्ति हुई थी। नंदीश ने बताया कि जब वह स्कूल में ज्वाइन करने पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वहां पहले से प्रधानाध्यापक है। इसकी शिकायत करने के लिए जब वह एसएससी दफ्तर पहुंचे तो वहां उन्हें अपमानित किया गया। 

उन्होंने इस बारे में फेसबुक पर लिखा है। इसकी जानकारी मिलने पर एसएससी चेयरमैन ने फोन कर उन्हें परिणाम भुगतने की धमकी दी है। चेयरमैन ने कहा कि तुमने सांप की पूंछ पर पैर रख दिया है। इसका क्या परिणाम होगा, यह जानते भी नहीं हो। उन्हें फेसबुक पोस्ट डिलीट करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि नंदीश ने यह पोस्ट डिलीट नहीं किया है। बड़ी संख्या में लोग उनके पोस्ट को साझा कर रहे हैं। दरअसल प्रधान शिक्षक की परीक्षा पास करने के बाद उनकी काउंसिलिंग हुई थी। काउंसिलिंग में वह पास हुए और उन्हें बर्दवान जिले के निगुना सुंदर नारायण हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्त किया गया। वहां जाने के बाद उन्हें पता चला कि इस पद पर पहले से ही शिक्षक की नियुक्ति हो चुकी है। इसके बाद वह शिकायत कराने के लिए एसएससी दफ्तर पहुंचे जहां संयोग से चेयरमैन भी मौजूद थे। 

उन्होंने उन्हें अपमानित किया और कहा कि समस्या का समाधान आप खुद करिए। आपकी योग्यता प्रधानाध्यापक बनने की नहीं है। नंदीश की तरह ही मुर्शिदाबाद जिले की एक शिक्षिका ने भी इसी तरह का आरोप लगाया है। हालांकि उन्होंने अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि उन्हें भी जिस स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया वहां पहले से ही प्रधानाध्यापक की नियुक्ति हो चुकी थी। उन्होंने एसएससी में शिकायत की, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया। वह घर पर बैठी हैं। 

इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए जब एसएससी चेयरमैन सौमित्र से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग से जहां-जहां रिक्त पद की सूची मिलती है वहां प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति कर भेजा जाता है। कहां कितने पद खाली हैं, किस स्कूल में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति होनी चाहिए यह देखने का काम जिला शिक्षा अधिकारी का है। उसी रिपोर्ट को शिक्षा विभाग एसएससी को भेजता है और एसएससी नियुक्त करता है। इसमें हमारी कोई गलती नहीं। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि आपने प्रधानाध्यापक को फोन करके धमकाया क्यों, तब उन्होंने कहा, "मैंने ऐसी कोई धमकी नहीं दी है।"

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