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पंजाब विधानसभा: केंद्रीय कृषि अधिनियमों को रद्द करने का बिल नहीं हो पाया तैयार, प्रथम दिन हंगामे की भेंट चढ़ा

संजीवनी टुडे 19-10-2020 20:27:38

सदन की कारवाई कल तक के लिए स्थागित कर दी गई है। बिल को सरकार द्वारा पूरी तरह गुप्त रखा गया है।


चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के दो दिन के विशेष सत्र का प्रथम दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। यह विशेष सत्र तीन केंद्रीय कृषि अधिनियमों के विरुद्ध कोई कठोर निर्णय लेने के लिए बुलाया गया है, परन्तु पंजाब सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला बिल अभी तक तैयार नहीं हो सका। सदन की कारवाई कल तक के लिए स्थागित कर दी गई है। बिल को सरकार द्वारा पूरी तरह गुप्त रखा गया है। यहां तक के मंत्रियों को भी बिल के विषय का पूरा पता नहीं है और बिल कल ही पेश किया जाना है।

विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए के लिए अकाली दल के विधायक ट्रैक्टरों पर आये थे लेकिन उन्हें चंडीगढ़ पुलिस ने विधानसभा की राह से पहले ही रोक लिया। कुछ विधायक भी ट्रेक्टर से आए थे। आम आदमी पार्टी के विधायक काले चोगे डालकर सदन में आए। आप विधायकों और अकाली दल विधायकों ने सदन के बाहर केंद्रीय कृषि एक्ट की प्रतियां रोष स्वरूप जलाई।

तीन केंद्रीय बिलों के विरुद्ध ही पंजाब विधानसभा का दो दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रथम दिन राज्य में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान हुई 9 किसानों की मौत पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। नियमों और परम्पराओं के अनुसार कुछ समय के स्थगन के बाद सदन की कारवाई शुरू हुई तो आम आदमी पार्टी और अकाली दल के विधायकों ने इस बात पर हंगामा खड़ा कर दिया कि कृषि अधिनियमों के विरुद्ध पंजाब विधानसभा में जो बिल रखा जाना है, उसकी कॉपी अभी तक क्यों नहीं दी गई। इसे लेकर सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। आम आदमी पार्टी के विधायक सदन के वेल में गए और वहीँ बैठ गए।

विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह ने अंतत: सदन की कारवाई कल मंगलवार तक के लिए स्थागित कर दी। वास्तव में विधानसभा में संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म महिंदरा बीमार होने की वजह से सत्र में नहीं आ सके, इसलिए बिलों की कॉपी भी तैयार नहीं हो सकी। सदन की बिज़नेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस बात को बताया गया और इसी के चलते बिलों को कल 20 अक्टूबर को पेश करने का विचार हुआ।

सदन में आज डेढ़ वर्ष के राजनीतिक अज्ञातवास के उपरांत कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू शामिल हुए। वे अन्य विधायकों से तो मिले पर उन्होंने मुख्यमंत्री से एक बार भी सलाम नहीं किया। मंत्री पद छोड़ने के बाद से सिद्धू राजनीतिक अज्ञातवास में थे। उल्लेखनीय है कि सप्ताह पूर्व राहुल गांधी के पंजाब दौरे के दौरान सिद्धू और कैप्टन समर्थकों में तल्खी और बढ़ गई थी।

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