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पंजाब सरकार ने किसानों को दिया जोर का झटका, केंद्र से माफ़ करोड़ों के खर्च किसानों पर थोपे

संजीवनी टुडे 30-09-2020 22:45:23

किसानों की हिमायती होने का दावा करने वाली पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने किसानों को जोर का झटका दिया है।


चंडीगढ़। किसानों की हिमायती होने का दावा करने वाली पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने किसानों को जोर का झटका दिया है। कृषि आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा फसल बेचने के समय जो करोड़ों के खर्च किसानों के माफ़ किये थे, पंजाब सरकार ने उन्हें किसानों पर फिर से लगाने के लिए आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है। 

दरअसल, केंद्र ने पंजाब के व्यापारियों को 105 करोड़ रुपये की राशि इसी लिए रोक ली थी, क्योंकि व्यापारियों ने मंडी में फसल लाने वाले किसानों से फसल की उतरवाई, सफाई और ड्रेसिंग के 20 करोड़ रुपये गत अप्रैल माह में गेंहू की फसल के दौरान वसूल लिये थे। हालांकि केंद्र सरकार ने ऐसा न करने के लिए बाकायदा पत्र जारी किये था। 

पंजाब में पहले से एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी)  अधिनियम लागू है और इस एक्ट के उपबंधों अनुसार जब किसान अपनी फसल मंडी में लेकर आता है तो उस फसल की उतरवाई और सफाई इत्यादि का खर्च किसान ही अदा करता रहा है। ऐसा 1961 से ही चला आ रहा है परन्तु गत वर्ष केंद्र सरकार ने किसानों की फसल आय में वृद्धि के मकसद से ये तमाम खर्चे किसान से न लेने के निर्देश जारी किये थे। इसके बावजूद पंजाब में ये खर्चे इस बार की गेंहू की फसल में किसानों से वसूले गए। इसी के चलते केंद्रीय खरीद एजेंसी भारतीय खाद्य निगम ( एफसीआई ) ने फसल खरीदने वाले व्यापारियों की कमीशन व अन्य खर्चों की 105 करोड़ की राशि रोक ली। एफसीआई ने स्पष्ट तौर पर कहा कि केंद्र सरकार के नियमानुसार जब तक व्यापारी किसानों से लिए खर्चे उनको नहीं लौटाते, तब तक उनकी राशि नहीं जारी की जाएगी। इसके चलते व्यापारी नाराज़ थे। 

गौरतलब है कि मंडी में आने वाली फसल पर किसान से गेंहू पर 12 रुपये और धान पर 16 रुपये प्रति क्विंटल खर्च लिया जाता है। ये राशि किसान की फसल खरीद के बाद अदा की जाने वाली राशि में से काट ली जाती है, जिस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति की थी। अब पंजाब ने केंद्र के नियम को पिछले दरवाजे से रद्द करने का तरीका ढूंढा है, जिसके अनुसार पंजाब मंडी बोर्ड की तरफ से एक स्पेशल आधिकारिक पत्र जारी किया गया है।इसमें कहा गया है कि फसल बेचने वाले को फसल की बोली से पहले तक के होने वाले खर्च फसल उतरवाई , सफाई, ड्रेसिंग का खर्च फसल खरीदने वाले (व्यापारी) को देना होगा जबकि व्यापारी किसान को एक बार में फसल की पूरी राशि ही देंगे।

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