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दिल्ली विधानसभा में NPR और NRC के खिलाफ प्रस्ताव पास, केजरीवाल बोले- मेरे परिवार के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं

संजीवनी टुडे 13-03-2020 21:52:30

दिल्ली विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में शुक्रवार को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी लागू नहीं होना चाहिए।


नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में शुक्रवार को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी लागू नहीं होना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से एनपीआर की प्रक्रिया रोकने की मांग की है मुख्य विपक्षी दल भाजपा के वरिष्ठ सदस्य विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष ने उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया। गुप्ता ने सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा, "दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर बोलने के लिए जब मैं सदन में खड़ा हुआ और हिंसा में शामिल आम आदमी पार्टी के लोगों की सच्चाई बताने लगा तो सत्तापक्ष के सदस्यों ने सदन में हंगामा कर मुझे बाहर निकाल दिया।"

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सदन में इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब में केंद्र सरकार पर तंज कसा कि मेरे मंत्रियों के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं है। मेरे पास और मेरी पत्नी के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं हैं। मेरे माता-पिता के पास भी नहीं है। 70 लोगों की इस विधानसभा में 61 लोगों के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं है। तो क्या सभी को डिटेंशन सेंटर भेज दिया जाएगा। देश के अधिकतर मुख्यमंत्रियों के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं है।उन्होंने कहा कि देश के 11 राज्यों की विधानसभाओं ने कह दिया है कि एनपीआर और एनआरसी नहीं लागू होना चाहिए। 

इससे पहले, श्रम एवं पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने सदन में प्रस्ताव पेश किया। राय के प्रस्ताव के अनुसार एनपीआर और एनआरसी को वापस लिया जाए। यदि एनपीआर की कवायद होती भी है तो वर्ष 2010 के फार्मेट के अनुसार होना चाहिए, नया फार्मेट तो हमें कतई मंजूर नहीं है। राय ने कहा कि एनपीआर और एनआरसी देश के हर एक नागरिक की नागरिकता के साथ धोखा है। अगर हमारे पास कागज नहीं है तो क्या हम अपने ही देश में बाहरी घोषित किये जाएंगे? 

इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा, आतिशी, दिलीप पांडेय समेत कई सदस्यों ने हिस्सा लिया। आतिशी ने कहा कि एनपीआर का एक ही उद्देश्य है कि इसे एनआरसी में बदल दिया जाएगा। एनपीआर के जरिए केंद्र सरकार पीछे के दरवाजे से एनआरसी लाने की कोशिश कर रही है। दिलीप पांडे ने कहा कि असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार एनपीआर की कवायद कर रही है। सरकार कह रही है कि एनपीआर और एनआरसी कराएंगे, लेकिन इसके लिए पैसे कहां से लाएंगे? इतने डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए कहां से पैसा लाएंगे? जो लोग बाहर कर दिए जाएंगे उनके साथ क्या किया जाएगा? इसके बारे में सरकार कुछ नहीं बोल रही है। 

राघव चड्ढा ने कहा कि एक पुराना एनपीआर 2010 का और एक 2020 का एनपीआर है। पुराने वाले में मात्र 13 जानकारियां ली गई हैं। 2020 वाले में जनता से 21 जानकारियां मांगी जा रही हैं, जिसमें सबसे खतरनाक जानकारी उनके माता-पिता का जन्म प्रमाण-पत्र मांगा जाना है। यदि किसी के पास ये नहीं है तो वो व्यक्ति संदिग्ध माना जाएगा। आज भी देश में बच्चे घरों में पैदा होते हैं। आज भी इस देश में बहुत बड़ी आबादी के पास जन्म प्रमाण-पत्र नहीं है। उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर की तस्वीरें भी सदन में पेश कीं, जो अभी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के सहयोगी दलों ने भी इस कानून को स्वीकार नहीं किया गया है। बिहार में इसके खिलाफ प्रस्ताव पास किया है जहां इनकी गठबंधन सरकार है। शिरोमणि अकाली दल (बादल), एआईएडीएमके जैसे इसके साथियों ने भी इसका विरोध किया है। 

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