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पटियाला हाउस कोर्ट: कोर्ट की वेबसाइट पर गलत आदेश अपलोड करने वाले मास्टर तपन चक्रवर्ती की SC में जमानत याचिका खारिज

संजीवनी टुडे 18-04-2019 21:08:08


नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कोर्ट की वेबसाइट पर गलत आदेश अपलोड करने के आरोपित सुप्रीम कोर्ट के पूर्व कोर्ट मास्टर तपन चक्रवर्ती की जमानत याचिका खारिज कर दी है। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मनीष खुराना ने तपन चक्रवर्ती की जमानत याचिका खारिज की।

आज तपन चक्रवर्ती की पुलिस हिरासत खत्म हो रही थी जिसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे कोर्ट में पेश किया था। तपन चक्रवर्ती ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने कहा कि खराब स्वास्थ्य को वेरिफाई नहीं किया गया है। कोर्ट ने आज तपन चक्रवर्ती को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

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इस मामले में दूसरे अभियुक्त मानव शर्मा को कोर्ट ने पिछले 15 अप्रैल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। दोनों को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आठ अप्रैल को गिरफ्तार किया था। आठ अप्रैल को कोर्ट ने दोनों कर्मचारियों को 15 अप्रैल तक की पुलिस रिमांड पर भेजा था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोप गंभीर है। ये मामला सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसकी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

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सुनवाई के दौरान दोनों आरोपितों की ओर से वकील जेपी सिंह ने कहा था कि गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं बनता है। उन्हें झूठे तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने कहा था कि घटना जनवरी की है जबकि एफआईआर मार्च में दर्ज किया गया। उन्हें जनवरी में गिरफ्तार नहीं किया गया और वे पुलिस की जांच में पूरा सहयोग कर रहे थे इसलिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है। दोनों आरोपितों की ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ पहले ऐसा कोई आरोप नहीं लगा है। उन्होंने कहा था कि कोर्ट के आदेश को वेबसाइट पर अपलोड करने की जिम्मेदारी उनकी नहीं होती है। आदेश की पहले संबंधित अधिकारी जांच करते हैं उसके बाद ही अपलोड किया जाता है।

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मानव शर्मा और तपन कुमार चक्रवर्ती सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर यानि असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे। दोनों की जिम्मेदारी जजों द्वारा डिक्टेट किए गए आदेश को नोट कर उसे कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने की थी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच की अवमानना के मामले में अनिल अंबानी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिया था लेकिन इन दोनों कोर्ट मास्टर ने जो आदेश अपलोड किया उसके मुताबिक अनिल अंबानी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं थी। 

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इन कोर्ट मास्टर्स ने पिछले सात जनवरी को वह आदेश अपलोड किया था लेकिन बाद में एरिक्सन के वकील दुष्यंत दवे ने जब जस्टिस नरीमन का ध्यान इस तरफ दिलाया तो वे आश्चर्यचकित हो गए। फिर उन्होंने 10 जनवरी को आदेश सही करवाकर अपलोड करवाया। उसके बाद जस्टिस आरएफ नरीमन ने इसकी शिकायत चीफ जस्टिस से की जिसके बाद इसकी जांच की गई। उसके बाद चीफ जस्टिस ने धारा 311 का उपयोग करते हुए दोनों को बर्खास्त कर दिया था।

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